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Coronavirus In India: भारत में क्यों है रिकवरी रेट ज्यादा और डेथ रेट कम? BHU के प्रोफेसर की रिसर्च में हुआ खुलासा

(AP Photo/Ajit Solanki)

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश (Coronavirus In India) में अभी 9,66,382 मरीजों का कोरोना वायरस का इलाज जारी है और 46,74,987 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं. गुरुवार को 1,129 और लोगों की मौत से मृतक संख्या बढ़कर 91,149 हो गई.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 24, 2020, 7:49 PM IST

नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus In india) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. भारत में कोविड-19 के मामले 57 लाख के पार हो गए हैं, वहीं 46 लाख से अधिक लोग संक्रमण मुक्त हुए हैं. देश में मरीजों के ठीक होने की दर 81.55 प्रतिशत है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार सुबह आठ बजे जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार एक दिन में कोविड-19 के 86,508 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमण के मामले बढ़कर 57,32,518 हो गए हैं. वहीं पिछले 24 घंटे में 1,129 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 91,149 हो गई. देश में अभी तक 46,74,987 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं. कोविड-19 से होने वाली मौतों की दर 1.59 प्रतिशत है.

इस बीच शोध सामने आया है जिसमें दावा किया गया है कि हमारे यहां रिकवरी रेट एक खास वजह से बहुत ज्यादा अच्छी है. काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और उऩकी टीम द्वारा किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि भारत के लोगों की अपनी इम्यूनिटी के चलते रिकवरी रेट हाई है और मृत्यु दर दुनिया के औसत से कम है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चौबे और उनकी टीम ने शोध में पाया कि भारत में हर्ड इम्यूनिटी से ज्यादा क्षमता पहले से ही लोगों के जीन यानी वंशाणुओं में है. इस शोध के लिए अलग-अलग देशों के लोगों के जिनोम इकट्ठा किए गए थे.

यह भी पढ़ें: Corona Recovery Rate: देश में पिछले 5 दिन में नए कोरोना केस से ज्यादा ठीक हुए मरीज, देखें आंकड़े

 पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंसेज में छपा शोधभारतीय लोगों को उनके शरीर में यह क्षमता कोशिकाओं में मौजूद एक्स क्रोमोसोम के जीन एसीई-2 रिसेप्ट (गेटवे) से मिलती है. जिसके चलते जीन पर चल रहा म्यूटेशन कोशिकाओं में कोरोना की एंट्री को रोक देते हैं. इस म्यूटेशन का नाम RS-2285666 है. बताया गया कि भारत के लोगों में यह जीनोम बना हुआ है. भारतीय लोगों के जीनोम में यूनीक म्यूटेशन्स भी हैं जिसके चलते मृत्युदर कम और रिकवरी रेट ज्यादा है.

प्रोफेसर चौबे ने बताया कि अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप, एशिया, साइबेरिया और पापुआ न्यू गिनी तक के 483 लोगों के सैंपल्स लिए गए हैं. चौबे का यह पेपर  अमेरिका के पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंसेज में छापा गया है.



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