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British Airways ने बोइंग 747 विमान को बाय-बाय किया, कोरोना वायरस बना वजह

लंदन. पिछले हफ्ते ब्रिटिश एयरवेज (British Airways) के आखिरी दो बोइंग विमानों की अंतिम उड़ानों को देखने के लिए लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे ( Heathrow Airport) के बाहर दर्शकों की भीड़ उमड़ी. लेकिन इन दोनों विमानों की विदाई पर दर्शकों के चेहरे मायूस नजर आए. बोइंग 747 (Boeing 747) और एयरबस ए 380 जैसे चार इंजन वाले विमानों की अब विदाई हो चुकी है. इसका बड़ा कारण कोरोनावायरस (Corona virus) को माना जा रहा है. बोइंग 747 विमान 1994 और एयरबस ए 380 विमान 1998 में ब्रिटिश एयरवेज में शामिल हुए थे. दोनों विमानों ने मिलकर 24,432 उड़ानें और 104 मिलियन मील की दूरी तय की है. एयरलाइन ने इनकी विदाई की अंतिम उड़ान के पलों को अपने फेसबुक पेज भी साझा किया है. आइए एक नजर डालते हैं इन दोनों बोइंग विमानों के खूबसूरत सफर पर.

बोइंग 747 विमान की उत्पत्ति
आधुनिक नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में बोइंग 747 विमान के सामन आज भी कोई विमान नहीं टिकता है. चौड़े आकार और चार इंजन वाले 747 विमान ने अपनी पहली उड़ान 1969 में भरी थी, जिसमें वह 400 से 600 यात्रियों को लेकर उड़ान भरने में सक्षम रहा था. व्यावसायिक अनिवार्यता के चलते 747 विमान की उत्पत्ति हुई थी. विमान 747 के पीछे की एक बड़ी कहानी है. अमेरिकी कंपनी ने 1966 में 747 विमान के ऑर्डर लेने शुरू कर दिये थे. उसी साल 10 एयरलाइंस ने 83, 747 विमानों के ऑर्डर दिए थे जिसमें अमेरिका की पांच और फ्रांस, जर्मनी, इटली,जापान और ब्रिटेन की एक-एक एयरलाइन कंपनी शामिल थी. वहीं, भारत ने पहले दो 747 विमामों के ऑर्डर दिए और तब से 1995 के बीच 17 और विमानों को खरीदा. वहीं, वर्ष 1966 के बाद वर्ष 1986 और 1990 में 747 विमानों की खूब मांग बढ़ी थी. इसके बाद से विमान 747 को ‘जम्बो’ के नाम से जाना गया.

यह भी पढ़ें: Google अगले साल तक गूगल Hangouts को करेगा बंद, डेटा करेगा यहां ट्रांसफरबोइंग 747 विमान 1970 और 1980 में चमका सितारा

1970 और 1980 में 747 विमान अपने स्वर्ण युग में था. लंबी दूरी के मार्ग को आसानी से तय करने में इसका कोई कॉम्पिटिटर नहीं था. इस अवधि में एयरलाइन व्यवसाय, तकनीकी विकास और प्रतिस्पर्धा को देखते हुए नए बोइंग एयरलाइंस के को नए ऑर्डर मिलने लगे. वहीं, कई एयरलाइंस कंपनियों ने इन विमानों को और आधुनिक बनाने की भी मांग की. वर्ष 1991 में बोइंग के यूरोपीय प्रतिद्वंद्वी एयरबस ने अपना चार इंजन वाला A340 विमान लॉन्च किया था. इसके तीन साल बाद बोइंग ने अपना एक दो इंजन वाला 777 विमान लॉन्च किया, जो 300 से 550 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है.

बोइंग 747 के लिए चुनौतीपूर्ण रहे दो इंजन वाले विमान
नई पीढ़ी के दो इंजन वाले विमान, बोइंग 747 के लिए चुनौती बनकर उभरे. इनमें यात्रा में लगने वाले समय में कटौती आई जिसे एक्टेंड डायवर्जन टाइम ऑपरेशन (EDTO) कहा जाता है. बोइंग ने भी अपने अन्य विमानों में EDTO का अनुसरण किया. बता दें कि वर्ष 2005 और 2006 में 747 विमानों के ज्यादा ऑर्डर आखिरी बार बुक हुए थे. पिछले कुछ वर्षों में, महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिचालनों के लिए लगभग सभी एयरलाइंस ने 747 को खरीदा. जिसमें जापान ने सबसे ज्यादा 108 विमान खरीदे थे.

पिछले 50 वर्षों का खरीद का आंकड़ा

एक बाद एक अन्य एयरलाइंस ने 747 विमानों को चरणबद्ध करना शुरू कर दिया. इस तरह पिछले 50 सालों में दस एयरलाइंस ने 1,556 बोइंग 747 विमानों को अपने खेमें शामिल किया. जापान ने साल 2011, अमेरिका ने 2017, ऑस्ट्रेलिया की क्वंतास एयरलाइन ने इस साल जुलाई में बोइंग 747 विमानों को खरीदा, लेकिन कोरोनावायरस के कारण बोइंग 747 की खरीद पर बड़ा असर पड़ा. एविएशन पोर्टल सिंपल प्लाइंग के अनुसार, जुलाई में 747 विमान की 97 फीसदी और एयरबस एयरलाइंस के ए 380 की 91 फीसदी उड़ानों पर कोरोना का असर पड़ा.

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कोरोनावायरस के कारण धड़ाम हुआ बोइंग 747 का बिजनेस
दुनियाभर में फैली महामारी कोरोनावायरस का बड़ा असर एयरलाइंस कंपनियों पर भी देखने को मिला. बता दें कि वर्तमान साल में वायरस के प्रभाव के कारण बोइंग 747 के ऑर्डर में 95 फीसदी और एयरबस में 80 फीसदी की गिरावट आई है. इस पर ब्रिटिश एयरवेज का मानना है कि वर्ष 2023-24 तक स्थिति सुधरने की उम्मीद नहीं है.



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