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यहां दी जाती है प्राचीन हिंदू ग्रंथों की शिक्षा, विदेशों से भी आते हैं छात्र

Highlights:

-हिंदू संस्कृति से आॅनलाइन रूबरू कराते हैं आचार्य प्रशांत

-ग्रेटर नोएडा स्थित सेंटर में दी जाती है छात्रों को शिक्षा

-कहा- उपनिषदों और गीता के अध्ययन से मानसिक बीमारियों का इलाज संभव है

ग्रेटर नोएडा। आजकल के दौर में लोग अपने प्राचीन संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। हमारे प्राचीन हिंदू ग्रंथों और उपनषिदों के बारे में युवा पीढ़ी की जानकारी जीरो के बराबर में हैं। ऐसे में एक आचार्य युवा पीढ़ी ही नहीं बल्कि विदेशियों का भी भारतीय ग्रंथों से परिचय करा रहे हैं। ऐसा करके वह भारत की संस्कृति को जिंदा रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इतना ही ग्रेटर नोएडा स्थित उनके सेंटर में देशी और विदेशी छात्र—छात्राओं को अन्य धार्मिक ग्रंथों की भी शिक्षा दी जाती है।

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ग्रेटर नोएडा के चाई—3 में अद्वैत बोधस्थल नाम से आचार्य प्रशांत का सेंटर है। इसकी खास बात यह है कि यहां पर छात्रों को प्राचीन हिंदू ग्रंथों व उपनिषदों की शिक्षा दी जाती है। इस बारे में प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक आचार्य प्रशांत कहते हैं कि आज की पीढ़ी वैदिक संस्कृति और शास्त्रों से कट चुकी है। उन्हें फिर से भारत और विश्वभर के उच्चतम आध्यात्मिक साहित्य से जोड़ने की प्रक्रिया में ऑनलाइन एजुकेशन की अहम भूमिका है। उनका मानना है कि आज का मनुष्य जितना मानसिक तौर पर बीमार है, उतना कभी न था। सभी मानसिक, सामाजिक और वैश्विक बीमारियों का इलाज उपनिषदों, गीता और अन्य शास्त्रों के अध्ययन से संभव है। दुनिया के हर कोने में हर व्यक्ति तक इन शास्त्रों का ज्ञान पहुंचाने के लिए प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन 20 से अधिक कोर्स चला रही है।

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उन्होंने बताया कि जीवन जिज्ञासा, शास्त्र कौमुदी, अद्वैत बोध शिविर, उपनिषद समागम और शांतिपूर्ण जीवन प्रमुख हैं। इनमें प्राचीन ग्रंथ जैसे श्रीमद्भगवदगीता, रामचरितमानस, अष्टावक्र-गीता, उपनिषद (कठ, केन, ईशावास्य) आदि पढ़ाए जाते हैं। उनके यहां हर माह 500 से 600 स्टूडेंट्स प्राचीन भारतीय संस्कृति से रूबरू होते हैं। जबकि साल में इनकी संख्या 6000 से 7000 है। विदेशी छात्रों को ध्यान में रखते हुए अंग्रेजी में भी इन ग्रंथों को पढ़ाया जाता है। उनका कहना है कि भविष्य में अन्य भाषाओं में इनका अनुवाद किया जाएगा। इस पर भी काम चल रहा है।

बता दें कि आचार्य प्रशांत वर्ष 2006 से इस क्षेत्र में कार्यरत। 42 वर्षीय आचार्य लोगों तक भारतीय संस्कृति पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का भी बखूबी इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए वह फेसबुक और यूट्यूब का सहारा लेते हैं। वह आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद से उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद शास्त्रों के माध्यम से लोगों को प्राचीन संस्कृति से जोड़ रहे हैं।



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