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उत्तर प्रदेशः 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती में कितने पेंच


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Twitter/MritunjayKumar

उत्तर प्रदेश के 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती विवादों में फँस गई है.

एक ओर जहां इसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच और सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही सुनवाई चल रही है वहीं अब प्रयागराज पुलिस ने भर्ती में फ़र्ज़ीवाड़े के आरोप में 11 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भर्ती में धांधली का मुद्दा उठाते हुए जाँच की माँग की है और आंदोलन की चेतावनी दी है.

वहीं प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा, “इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने की मंशा से राजनीति की जा रही है और प्रश्न उठाए जा रहे हैं.”

मंत्री ने बताया कि इस मामले को अब विशेष जाँच दल यानी एसटीएफ़ को सौंप दिया गया है.

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Twitter/SatishDwivedi

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बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी

क्या है ये पूरा मामला

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए दिसंबर 2018 में रिक्तियाँ निकाली थी.

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राइमरी स्कूलों में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा करवाई थी.

इस परीक्षा में क़रीब चार लाख आवेदकों ने हिस्सा लिया था. इस लिखित परीक्षा के एक दिन बाद ही सरकार ने इसके कट ऑफ़ के मानक तय कर दिए थे.

परीक्षा 150 अंकों की थी जिसमें से सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी को कम-से-कम 65% यानी 97 और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को कम-से-कम 60% यानी 90 अंक लाने थे.

लेकिन इससे पहले सहायक शिक्षकों के 68,500 पदों के लिए जब भर्ती हुई थी तब सामान्य वर्ग के लिए कट ऑफ़ 45% और आरक्षित वर्ग के लिए 40% था.

नई भर्ती में कट ऑफ़ बढ़ाने को अदालत में चुनौती दी गई. 11 जनवरी 2019 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की सिंगल बैंच ने कट ऑफ़ को फिर से 45 और 40 फ़ीसदी कर दिया.

लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने मई 2019 में हाई कोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर कर दी. वहीं बीएड और बीटीसी पास कर चुके अभ्यर्थियों के एक समूह ने भी हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर कर दी.

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नतीजा आने से पहले ही भर्ती का ये मामला अदालती दाँवपेंच में फंस गया.

अदालत में सुनवाई चलती रही और फिर 6 मई 2020 को हाईकोर्ट ने सरकार को राहत देते हुए कट ऑफ़ को फिर से 97 नंबर और 90 नंबर कर दिया.

अदालत ने सरकार को भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया. इसके बाद 13 मई को नतीजे जारी कर दिए गए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सप्ताह के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया.

अदालती कार्रवाई पर बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा, “भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, नतीजा भी तैयार कर लिया गया था. लेकिन मामला अदालत पहुंचने के कारण नतीजा जारी करने में देर हुई.”

मामला फिर हाईकोर्ट में

लेकिन परीक्षार्थियों के एक समूह ने परीक्षा में पूछे गए कुछ प्रश्नों के सही उत्तरों पर सवाल करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर कर दी थी.

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने शिक्षकों की भर्ती पर 12 जुलाई तक रोक लगा दी.

इस मामले पर अभी हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अदालत के इस फ़ैसले को चुनौती दी है.

सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई

उधर, हाईकोर्ट के फ़ैसले से नाराज़ शिक्षामित्रों (सहायक शिक्षक) का एक समूह सुप्रीम कोर्ट चला गया था जहाँ इस मामले की सुनवाई चल रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने 3 जून से 6 जून के बीच हो रही काउंसलिंग पर रोक लगा दी थी.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को 37,339 पदों को होल्ड करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट में 14 जुलाई को इस मामले की अगली सुनवाई होगी.

प्रयागराज पुलिस की कार्रवाई

प्रयागराज पुलिस ने शिक्षक भर्ती में फ़र्ज़ीवाड़े के आरोप में कुल 11 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

प्रयागराज पुलिस ने गिरफ़्तारियों की पुष्टि करते हुए बताया है कि एक अभ्यर्थी की शिकायत के आधार पर जाँच करते हुए ये गिरफ़्तारियां की गई हैं.

प्रयागराज के पुलिस अधीक्षक अनिरुद्ध पंकज ने बीबीसी को बताया, “हमारी टीम ने अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ़्तार किया है.”

कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पुलिस ने परीक्षा में टॉपरों में शामिल एक युवक को भी गिरफ़्तार किया है.

जब पुलिस अधीक्षक से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हमने धर्मेंद्र पटेल नाम के एक युवक को भी गिरफ़्तार किया है. वह टॉपर है या नहीं, अभी इसकी जाँच चल रही है.”

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी ने मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में बताया कि प्रयागराज पुलिस ने राहुल नाम के एक युवक की शिकायत पर कार्रवाई की है.

युवक का आरोप है कि प्रयागराज के एक नक़ल माफ़िया ने उनसे शिक्षक भर्ती में पास कराने के नाम पर पैसे लिए लेकिन उसे पास नहीं करा सके.

डॉ द्विवेदी ने प्रेसवार्ता में बताया, “राहुल नाम के शिकायतकर्ता ने मई 2020 में शिकायत दर्ज करवाई की थी कि फ़रवरी 2020 में उससे भर्ती में पास कराने के नाम पर पैसे लिए गए थे. तब तक परीक्षा हो चुकी थी, परिणाम तैयार हो चुका था, ऐसे में फ़रवरी 2020 में हुए किसी लेनदेन से परिणाम पर असर नहीं पड़ने वाला था, फिर भी हमने शिकायत को गंभीरता से लिया और प्रयागराज पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की.”

उन्होंने कहा, ‘डॉ केएल पटेल, संतोष कुमार बिंद और इनसे जुड़े हुए 11 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. आगे की जाँच एसटीएफ़ को सौंप दी गई है.’

उन्होंने कहा, ‘यदि जाँच में ये पाया गया कि कुछ अभ्यर्थी ग़लत तरीक़े से पास हुए हैं तो उन्हें डीबार कर दिया जाएगा.’

प्रियंका की आंदोलन की चेतावनी, मायावती की सीबीआई जाँच की मांग

कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर अभ्यर्थियों से संवाद करते हुए कहा, “सहायक शिक्षक भर्ती के रिज़ल्ट से बहुत आक्रोश, बहुत नाराज़गी हुई है. मीडिया रिपोर्टों से पता चल रहा है कि इस परीक्षा में बड़ा घोटाला हुआ है, बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है.”

एक ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘69000 शिक्षक भर्ती घोटाला उप्र का व्यापम घोटाला है. इस मामले में गड़बड़ी के तथ्य सामान्य नहीं हैं. डायरियों में स्टूडेंट्स के नाम, पैसे का लेनदेन, परीक्षा केंद्रों में बड़ी हेरफेर, इन गड़बड़ियों में रैकेट का शामिल होना – ये सब दर्शाता है कि इसके तार काफ़ी जगहों पर जुड़े हैं. सरकार अगर न्याय नहीं दे सकी तो इसका जवाब आंदोलन से दिया जाएगा. ‘

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी कहा है कि अब ये मामला काफ़ी गंभीर हो गया है और इसकी सीबीआई जाँच होनी चाहिए.

उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “उत्तर प्रदेश में 69 हज़ार शिक्षकों की भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़गड़ी, धांधली व भ्रष्टाचार आदि के सम्बंध में रोज़ नए-नए ख़ुलासे व तथ्यों के उजागर होने के कारण अब यह मामला काफ़ी गंभीर हो गया है. जनता काफ़ी आशंकित है. ऐसे में इसकी सीबीआई जाँच होनी चाहिए.”

वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को नकार दिया है. बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा, “पूरी भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने के लिए राजनीति की जा रही है ताकि योगी सरकार को लॉकडाउन के दौरान भी नौकरियां देने का श्रेय न मिले.”

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