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SC ने दी भगवान जगन्‍नाथ रथ यात्रा को हरी झंडी, शर्तों के साथ इजाजत

नई दिल्‍ली: पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ रथयात्रा की इजाजत दी. मंदिर प्रबंधन समिति, राज्य सरकार और केंद्र सरकार आपस में तालमेल कर रथयात्रा का आयोजन करवाएंगे. कोरोना से बचाव की गाइडलाइन का पालन करते हुए ऐसा किया जाएगा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पुरी में कोरोना के केसों की संख्‍या में बढ़ोतरी हो तो राज्‍य सरकार के पास रथ यात्रा रोकने की आजादी होगी. इससे पहले कॉलरा और प्लेग के दौरान भी रथ यात्रा सीमित नियमों और श्रद्धालुओं के बीच हुई थी. चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट केवल पुरी में यात्रा के बारे में विचार कर रहा है और ओडिशा में कहीं अन्‍य जगह पर नहीं. 

हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा कि 12 दिनों की यात्रा के दौरान 10 लाख श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है. कोरोना को देखते हुए ये घातक हो सकता है क्‍योंकि इतनी बड़ी संख्‍या में होने वाले आवागमन को ट्रैक करना मुश्किल होगा. 18-19 सदी में यात्रा के दौरान कॉलरा जैसी बीमारी फैली थी.

इससे पहले सॉलिसिटर जनरल ने कहा क‍ि शंकराचार्य , पुरी के गजपति और जगन्नाथ मंदिर समिति से सलाह कर यात्रा की इजाजत दी जा सकती है. केंद्र सरकार भी यही चाहती है कि कम से कम आवश्यक लोगों के ज़रिए यात्रा की रस्म निभाई जा सकती है. 

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इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि शंकराचार्य को क्यों शामिल किया जा रहा है? पहले से ट्रस्ट और मन्दिर कमेटी ही आयोजित करती है. शंकराचार्य को सरकार क्यों शामिल कर रही है?
केंद्र सरकार के वकील तुषार मेहता – नहीं. हम तो मशविरे की बात कर रहे हैं. वो सर्वोच्च धार्मिक गुरू हैं.  वकील हरीश साल्‍वे ने कहा कि कर्फ्यू लगा दिया जाय. रथ को सेवायत या पुलिस कर्मी खींचें जो कोविड निगेटिव हों. 

चीफ जस्टिस (CJI)- हमें पता है. ये सब माइक्रो मैनेजमेंट राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. केंद्र की गाइडलाइन के प्रावधानों का पालन करते हुए जनस्वास्थ्य के हित मुताबिक व्यवस्था हो.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता – गाइडलाइन के मुताबिक व्यवस्था होगी
सीजेआई – आप कौन सी गाइडलाइन की बात कर रहे हैं?
मेहता – जनता की सेहत को लेकर गाइडलाइन का पालन होगा
ओडिशा विकास परिषद के वकील रंजीत कुमार- 10 से 12 दिन की यात्रा होती है. इस दौरान अगर कोई समस्‍या होती है तो वैकल्पिक इंतजाम जरूरी है. मंदिर में 2.5 हजार पंडे हैं. सबको शामिल न होने दिया जाए
CJI- हम माइक्रो मैनेजमेंट नहीं करेंगे. स्वास्थ्य गाइलाइन के मुताबिक सरकार कदम उठाए. हम (यात्रा कैसे हो इस पर) कोई विस्तृत आदेश नहीं देंगे.

ओडिशा सरकार के वकील ने कहा कि हम मंदिर कमेटी और केंद्र के साथ समन्वय स्थापित कर यात्रा आयोजित करवाएंगे. श्रद्धालुओं की एक संस्था के वकील ने कहा कि यात्रा का सीधा प्रसारण हो तो हमें कोई समस्या नहीं है. इस तरह पूजा भी हो जाएगी और लोगों का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा.

दरअसल रथयात्रा पर रोक का आदेश 18 जून को चीफ जस्टिस की तीन जजों की बेंच ने दिया था. इस आदेश में संशोधन की मांग को लेकर दर्जन भर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया.



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