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Covid-19 के लिए नोएडा में शुरू हुआ एंटीजन जांच, पहुंचे 8 हजार किट्स

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हाइलाइट्स

  • नोएडा में कोरोना वायरस के लिए एंटीजन टेस्ट शुरू
  • CMO ने बताया- 8 हजार किट्स स्वास्थ्य विभाग को मिले
  • अभी 7 हजार और किट्स आना बाकी, डिटेल प्लान तैयार

नोएडा

उत्तर प्रदेश के जनपद गौतमबुद्धनगर में कोविड-19 के संक्रमण का पता लगाने के लिए शुक्रवार से एंटीजन जांच शुरू कर दी गई। जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी दीपक ओहरी ने जानकारी देते हुए बताया कि गुरुवार को 8 हजार एंटीजन किट स्वास्थ्य विभाग को मिल गए हैं। वहीं 7 हजार किट अभी आना बाकी है।

उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर एंटीजन जांच के बाद मिलने वाले मरीजों को भर्ती करने तथा उनके उपचार के लिए एक विस्तृत प्लान तैयार किया है। इसके तहत संदिग्ध मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती करा दिया जाएगा। अगर रिपोर्ट नेगेटिव आती है, तो मरीज का आरटीपीसीआर टेस्ट कराया जाएगा।

इस एंटीजन किट को कोरिया की कंपनी ने बनाया है। इस किट का प्रोडक्शन मानेसर में हो रहा है। नाक से सैंपल लेने के बाद 15 से 30 मिनट में यह किट जांच रिपोर्ट देती है। एम्स और आईसीएमआर की टीम ने जब इन किट्स का परीक्षण किया तो इस किट के नतीजे 99.3 से 100 पर्सेंट तक सही मिले। टेस्ट किट को 2 डिग्री से 30 डिग्री के बीच रखना होगा। डॉक्टरों का कहना है कि इसका मतलब यह हुआ है कि किट अगर पॉजिटिव रिपोर्ट देती है तो इस पर भरोसा किया जा सकता है। हालांकि संक्रमण के फैलाव को लेकर निगेटिव रिपोर्ट वाले लोगों की आरटी पीसीआर जांच जरूरी है।

किट पर लाल-गुलाबी रंग देगा जानकारी

नाक से सैंपल लेने के बाद वीटीएम में लार को डाला जाता है। इसके बाद किट पर मौजूद एक निश्चित जगह पर सैंपल की तीन बूंद को डाला जाता है। इसके बाद किट को 15 से 30 मिनट के लिए छोड़ दिया जाता है। अगर किट पर एक ही तरह का रंग दिखाई दे तो वह जांच सही नहीं है। लाल पट्टी आने पर सैंपल पॉजिटिव और गुलाबी पट्टी आने पर सैंपल निगेटिव होगा।

अभी जांच आरटीपीसीर मशीन से स्वैब सैंपल की मदद से

अभी कोविड की जांच के लिए आरटीपीसीर मशीन से जांच की जा रही है। इसके लिए लैब की जरूरत होती है और स्वैब सैंपल की मदद से जांच की जाती है। इसके अलावा TrueNat और CB-NAAT के जरिए भी जांच की जा रही है, यह मशीन टीबी की जांच के लिए होती हैं। जिसका इस्तेमाल अभी कोविड में हो रहा है। लेकिन इनकी क्षमता बहुत कम होती है। यह 45 मिनट में रिपोर्ट दे सकती हैं। लेकिन क्षमता कम होने की वजह से इसका इस्तेमाल केवल इमरजेंसी की स्थिति में किया जाता है।

सांकेतिक तस्वीर

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