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कोरोनावायरस 2013 से दुनिया में था लेकिन जिसने वर्तमान में महामारी फैलाई उसका जीनोम पुराने वायरस से अलग है

  • कनाडा की कैलगरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का दावा, वायरस अपना होस्ट बदलते ही खतरनाक हो जाता है
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना के रहते हुए चमगादड़ के इम्यून सिस्टम ने बचाव के लिए खुद को ढाला लेकिन इंसानों में अभी ऐसा नहीं हुआ

दैनिक भास्कर

Jun 27, 2020, 03:14 PM IST

 कनाडा के शोधकर्ताओं ने कोरोना की उत्पत्ति पर अपनी रिसर्च जारी की है। उनका कहना है कि कोरोनावायरस 2013 से ही दुनिया में मौजूद था लेकिन उसका जीनोम आज के कोरोना से अलग है। रिसर्च करने वाले कनाडा की कैलगरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, 30 दिसम्बर 2019 से लेकर 20 मार्च 2020 तक कोरोनावायरस के 479 जीनोम सिक्वेंस का अध्ययन किया गया। अध्ययन से यह समझने की कोशिश की गई कि समय के साथ कोरोना कितना बदला और वर्तमान में महामारी फैला रहे वायरस से इनका क्या सम्बंध है। 

  • रिसर्च जुड़ी 5 बड़ी बातें

होस्ट बदलने पर वायरस खतरनाक हो जाता है
शोधकर्ताओं के मुताबिक, एक नया वायरस तब खतरनाक होता है जब वह जानवर से इंसान में पहुंचता है। हो सकता है कि जब यह जानवर में हो तो उसमें हल्के लक्षण दिख रहे हैं। ऐसा भी हो सकता है कि वायरस जानवर को संक्रमित न कर रहा हो। लेकिन जब ये अपना होस्ट बदलता है तो बेहद खतरनाक साबित हो जाता है। 

समय के साथ चमगादड़ का इम्यून सिस्टम मजबूत हुआ
शोधकर्ताओं के मुताबिक, लम्बे तक रहने के कारण चमगादड़ का इम्यून सिस्टम इतना विकसित हो गया हो कि वायरस का असर ही न हो रहा हो लेकिन इंसानों में ऐसा नहीं है। इंसानों का इम्यून सिस्टम इस वायरस को झेलने के लिए इतना तैयार नहीं, इसलिए वे बीमार हो रहे हैं। 

96 फीसदी जीनोम बैट कोरोनावायरस का
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोनावायरस का चमगादड़ और पैंगोलिन से कनेक्शन मिला है। रिसर्च के दौरान 96 फीसदी जीनोम बैट कोरोनावायरस (RaTG13) से मिलता है। बैट कोरोना का मतलब वो कोरोना वायरस जिसने संक्रमण चमगादड़ के जरिए फैलाया। वहीं, 90 फीसदी जीनोम पैंगोलिन कोरोनावायस (Pangolin-CoV) से मिला है। 

कोरोना के 16 रूप दिखे
शोधकर्ताओं को 479 जीनोम सीक्वेंस में कोरोना के 16 अलग-अलग रूप दिखे हैं। इनमें 11 ऐसे थे जिनसे 5 फीसदी से अधिक संक्रमण फैला है। हर वायरस में अलग-अलग समय में बदलाव हुआ है।

नए कोरोना के पूर्वज का कनेक्शन जानवरों से
शोधकर्ताओं को वर्तमान में महामरी फैलाने वाले कोरोनावायरस के स्पाइक प्रोटीन का विश्लेषण करके इसे पूर्वज वायरस को समझने की कोशिश की है। नए कोरोना के पूर्वज वायरस का सीक्वेंस तैयार किया गया है जिसे N1 नाम दिया गया है। रिसर्च में सामने आया कि इसके पूर्वजों का कनेक्शन जानवरों से था। ये जानवरों में मौजूद थे।

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