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कोरोना वायरस को यूं शिकस्त दे रहा है आयुर्वेद! डॉ. आदिल ने बताई पूरी रिसर्च स्टोरी

कोरोना से जंग के बीच आयुर्वेद की कोशिश का ‘गुड रिजल्ट’
हाइलाइट्स

  • कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच दवाओं पर रिसर्च तेज
  • म्यूटेशन के बाद बना नया वायरस पहले से कम प्रभावी
  • आयुर्वेदिक दवाओं के इस्तेमाल के आ रहे अच्छे नतीजे
  • डॉक्टर आदिल ने 3 ग्रुप पर किया दवाओं का परीक्षण

लखनऊ

भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus Updates India) के बढ़ते मामलों के बीच कुछ बातें सुकून देने वाली हैं। इसमें से एक है इटली के डॉक्टर दावा, जिसमें उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस का असर अब कम हो रहा है। मतलब यह कि म्यूटेशन के बाद बना नया कोरोना वायरस (Coronavirus Latest News India) अब उतना प्रभावी नहीं है, जितना शुरुआती स्तर पर था। वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकबंधु अस्पताल में आयुर्वेद के पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. आदिल रईस भी कहते हैं कि महामारी में सावधानी बरतने की जरूरत है, ख्याल रखने की जरूरत है।

डॉ. आदिल रईस का कहना है, ‘कोरोना से डरने या परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि कुछ बातों का ख्याल रखकर मरीज ठीक हो रहे हैं। आयुर्वेद के जरिए कुछ मरीजों का इलाज किया गया और यह बहुत प्रभावी भी नजर आया।’

इस तरह से की गई रीसर्च

डॉ. आदिल कहते हैं, ‘हम लगातार रिसर्च कर रहे हैं। हमने कोरोना के प्रारंभिक लक्षणों वाले मरीजों के तीन ग्रुप बनाए। इनमें कोई भी गंभीर हालत में नहीं था। हमने तीन ग्रुपों के नाम क्रमश: ग्रुप A,ग्रुप B,ग्रुप C दिए। प्रत्येक ग्रुप में 30 मरीजों को रखा गया। ग्रुप ए के 30 में से 28 मरीजों की रिपोर्ट 5वें दिन निगेटिव आई। वहीं, ग्रुप बी में 30 मरीजों में से 26 मरीजों की रिपोर्ट 5वें दिन निगेटिव आई और ग्रुप C में 30 में से 17 लोगों की रिपोर्ट 5वें दिन निगेटिव आई। ग्रुप ए और ग्रुप बी में सभी 30 पेशंट्स 7वें दिन निगेटिव मिले। हालांकि, ग्रुप C में सातवें दिन 20 मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आई।’

पढ़ें: मरीजों पर ढीली पड़ रही है कोरोना की पकड़?


कहां तक पहुंची कौन सी वैक्‍सीन, सबकी लिस्‍ट

  • कहां तक पहुंची कौन सी वैक्‍सीन, सबकी लिस्‍ट

    डेवलपमेंट के लिहाज से ये 13 वैक्‍सीन सबसे ऐडवांस्‍ड हैं।1 – यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्‍सफर्ड और AstraZeneca Plc. (फाइनल स्‍टेज)2 – बीजिंग इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी और कैनसिनो बायोलॉजिकल इंक (स्‍टेज 2)3 – नैशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्‍फेक्शियस डिजीजेज (US) और Moderna Inc (स्‍टेज 2)4 – वुहान इंस्‍टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रॉडक्‍ट्स और साइनोफार्म (स्‍टेज 1/2)5 – बीजिंग इंस्‍टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रॉडक्‍ट्स/साइनोफार्म (स्‍टेज 1/2)6 – साइनोवैक (स्‍टेज 1/2)7 – बायोएनटेक/फोसन फार्मा/फिजर प्‍लैटफॉर्म आरएनए (स्‍टेज 1/2)8 – नोवावैक्‍स (स्‍टेज 1/2)9 – चाइनीज एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्‍टेज 1)10 – इनोवियो फार्मास्‍यूटिकल्‍स (स्‍टेज 1)11 – गेमलेया रिसर्च इंस्‍टीट्यूट (स्‍टेज 1)12 – इम्‍पीरियल कॉलेज, लदन (स्‍टेज 1)13 – क्‍योरवैक (स्‍टेज 1)

  • ऑक्‍सफर्ड वैक्‍सीन ट्रायल के लास्‍ट स्‍टेज में पहुंची

    यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्‍सफर्ड और AstraZeneca Plc. की एक्‍सपेरिमेंट वैक्‍सीन क्लिनिकल ट्रायल के फाइनल स्‍टेज में पहुंच गई है। वह दुनिया की पहली ऐसी वैक्‍सीन है जो इस स्‍टेज में पहुंची है। ChAdOx1 nCov-19 वैक्‍सीन अब 10,260 लोगों को दी जाएगी। इस वैक्‍सीन का ट्रायल यूनाइेड किंगडम के अलावा साउथ अफ्रीका और ब्राजील में भी हो रहा है। सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया ने भारत के लिए बड़े पैमाने पर वैक्‍सीन बनाने के लिए 100 मिलियन डॉलर इनवेस्‍ट किए हैं। यह वैक्‍सीन ChAdOx1 वायरस से बनी है जो सामान्‍य सर्दी देने वाले वायरस का एक कमजोर रूप है। इसे जेनेटिकली बदला गया है इसलिए यह इंसानों को इन्‍फेक्‍ट नहीं करता। अगर ट्रायल सफल रहा तो ग्रुप को उम्‍मीद है कि वैक्‍सीन इस साल के आखिर तक लॉन्‍च हो जाएगी।

  • चीन की वैक्‍सीन का ट्रायल फेज 2 में

    बीजिंग इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी और कैनसिनो बायोलॉजिकल इंक मिलकर जो वैक्सीन बना रहे हैं, वह क्लिनिकल इवैलुएशन के फेज 2 में हैं। वैक्‍सीन का रेगुलेटरी स्‍टेटस फेज 1 में है। यह वैक्‍सीन नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्‍टर प्‍लैटफॉर्म पर काम करती है।

  • Moderna Inc की वैक्‍सीन भी फेज 2 में

    अमेरिका के नैशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्‍फेक्शियस डिजीजेज और Moderna Inc की वैक्‍सीन भी ट्रायल के दूसरे दौर में हैं। इसका रेगुलेटरी स्‍टेटस भी फेज 1 में है। यह वैक्‍सीन LNPएनकैप्‍सुलेटेड mRNA पर आधारित है।

  • वुहान में भी बन रही कोरोना वैक्‍सीन

    चीन के वुहान शहर से निकलकर कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैला। वहां जो इनऐक्टिवेटेड प्‍लैटफॉर्म पर वैक्‍सीन बन रही है, वह अभी फेज 1/2 में है। इस फेज में दुनिया की और भी कई वैक्‍सीन्‍स हैं जैसे-बीजिंग इंस्‍टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रॉडक्‍ट्स/साइनोफार्मसाइनोवैकबायोएनटेक/फोसन फार्मा/फिजर प्‍लैटफॉर्म आरएनएनोवावैक्‍स

  • क्लिनिकल ट्रायल के फेज 1 में हैं ये कोरोना वैक्‍सीन्‍स

    लंदन के इम्‍पीरियल कॉलेज की वैक्‍सीन क्लिनिकल ट्रायल के फेज 1 में है। यह RNA बेस्‍ड वैक्‍सीन है। mRNA पर आधारित Curevac की वैक्‍सीन भी ट्रायल के पहले दौर में है। इसके अलावा गेमलेया रिसर्च इंस्‍टीट्यूट, इनोवियो फार्मास्‍यूटिकल्‍स और चाइनीज एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज की वैक्‍सीन भी डेवलपमेंट/रेगुलेशन के फर्स्‍ट फेज में हैं।

  • वैक्‍सीन डेवलपमेंट में लगते हैं सालों मगर इस बार...

    आमतौर पर एक वैक्‍सीन तैयार करने में 10 साल से भी ज्‍यादा का वक्‍त लगता है। एक साइंस जर्नल PLOS One में छपी स्‍टडी के अनुसार, वैक्‍सीन कैंडिडेट्स का सक्‍सेस रेट सिर्फ 6% है। मगर कोरोना वायरस ने दुनियाभर के रिसर्चर्स के सामने वक्‍त की चुनौती पेश की है। य बीमारी अबतक 4,80,000 से ज्‍यादा लोगों की जान ले चुकी है। 90 लाख से भी ज्‍यादा लोग इस वायरस से संक्रम‍ित हुए हैं। इसलिए वैक्‍सीन तैयार करने का काम युद्धस्‍तर पर हो रहा है।

“अगर हम इम्युनिटी को बेहतर कर लें तो आसानी से कोरोना को मात दी जा सकती है।”-डॉ. आदिल रईस, पंचकर्म विशेषज्ञ, लोकबंधु अस्पताल

मरीजों को दी गईं ये दवाएं

खैर, अब सवाल यह उठता है कि इन तीनों ग्रुप के मरीजों को क्या दिया गया। इसके बारे में डॉ. आदिल रईस कहते हैं, ‘ग्रुप ए को हमने व्याघ्रयादि काशय और समशामणि वटी दी। ग्रुप बी के मरीजों को हमने रसोन कल्क और शुंठी चूर्ण (सोंठ का पाउडर) दिया। ग्रुप सी को हमने दोनों यानी समूह ए और समूह बी से तुलनात्मक अध्य्यन के लिए रखा था। ग्रुप सी को हमने विटमिन सी की गोलियां दीं। हां, सभी मरीजों को हल्का भोजन (आसानी से पचने वाला), गरम पानी दिया गया। साथ ही नमक वाले गरम पानी से गरारे कराए गए। इसके बाद के नतीजे आपके सामने हैं।’

पढ़ें: काढ़े से ठीक किए कोरोना के 25 मरीज



‘हमारी कोशिश सफल हो रही है’

डॉ. आदिल बताते हैं, ‘अबतक की गई रिसर्च में जो परिणाम सामने आए हैं, उनको देखकर एक बात तो साफ है कि इस महामारी से घबराने की जरूरत नहीं है। अगर हम इम्युनिटी को बेहतर कर लें तो आसानी से कोरोना को मात दी जा सकती है।’ डॉ. आदिल कहते हैं, ‘डायरेक्टर डॉ. डीएस नेगी, सीएमएस डॉ. अमिता यादव और नैशनल हेल्थ मिशन (NHM) के डॉ. रामजी वर्मा, डॉ. हिमांशु आर्या का हमें बहुत सपॉर्ट मिल रहा है। उम्मीदों के मुताबिक, हमारी कोशिश सफल हो रही है।’

सांकेतिक तस्वीर

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