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लॉकडाउन: दुनिया को हंसाने वाले लोग आज एक-एक रुपये के लिए मोहताज, सहारा बने कुछ लोग

मुंबई के लोग लॉकडाउन के दौरान एक सर्कस के लोगों के लिए बड़ा सहारा बने (फाइल फोटो)

पीली और नीली धारियों और झूमते घोड़े वाले हिडोला से लैस मुंबई (Mumbai) में रैम्बो सर्कस में कभी बड़ी चहल-पहल हुआ करती थी, लेकिन लॉकडाउन (Lockdown) के सन्नाटे के चलते सर्कस पर ताला लग गया और घोड़े भी नाचने बंद हो गए.

मुंबई. कोरोना संकट (Corona Crisis) ने पूरी दुनिया के साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी करारी चोट की है. मनोरंजन उद्योग और सर्कस भी इससे अछूते नहीं हैं. लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से सर्कस (Circus) में काम करने वाले लोगों की कमाई भी ठप हो गई है. पिछले तीन महीने से काम बंद है और सर्कस में काम करने वाले कई लोग वापस घर भी नहीं लौट पा रहे है. पीली और नीली धारियों और झूमते घोड़े वाले हिडोला से लैस मुंबई में रैम्बो सर्कस में कभी बड़ी चहल-पहल हुआ करती थी, लेकिन लॉकडाउन के सन्नाटे के चलते सर्कस पर ताला लग गया और घोड़े भी नाचने बंद हो गए. परंतु, अब भी यहां जिंदगी संजीदगी से भरी है.

रैम्बो सर्कस के प्रबंधक बीजू नैयर ने कहा कि नवी मुंबई के एयरोली इलाके में लोगों का मनोरंजन करने के लिए यह सर्कस फरवरी में आया था और यह संकट के इन महीनों के दौरान उसकी मदद करने के लिए यहां के लोगों के प्रति ऋणी है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च को लॉकडाउन लगा दिया गया था, लेकिन उससे पहले से ही बीमारी के डर से लोगों का आना बंद कर देने के चलते सर्कस के शो बंद हो गए थे.

नैयर ने कहा कि लोगों को धन्यवाद करने के लिए शब्द कम पड़ जाएगा. उनके अनुसार जब वह कलाकारों और तकनीशियनों समेत अपने 90 सदस्यीय दल के साथ यहां आए थे तब वे लोग यहां किसी को नहीं जानते थे. लेकिन वे अब जानने लगे. नैयर ने कहा कि कुछ दुकानदारों ने गर्मी के महीनों में सब्जियों की सतत आपूर्ति सुनिश्चित की जबकि कुछ अन्य राशन पहुंचाने लगे. इन महीने के दौरान उन्हें जिंदा रहने में जिन लोगों ने मदद की उनमें एक एनसीपी नेता छगन भुजबल थे जिन्होंने खाद्य आपूर्ति में योगदान दिया.

निसर्ग तूफान ने भी पहुंचाया नुकसानलॉकडाउन से पहले सर्कस महज चार शो ही कर पाया. कुछ महीने बाद हर बार अपना ठिकाना बदल लेने वाला सर्कस फरवरी से यहीं जमा है. सर्कस के लोग अपने टेंटों में टेलीविजन सेट या मोबाइल से चिपके रहे तथा स्टोवों पर खाना पकाते रहे. बाहर लंबे-लंबे घास उग गये हैं. निसर्ग तूफान से उन्हें नुकसान पहुंचा. नैयर ने कहा, ‘जान तो किसी की नहीं गयी लेकिन चक्रवात से जेनरेटर और कुछ एयरकंडीशनों को नुकसान पहुंचा.’ उन्होंने कहा कि लेकिन मरम्मत एक बड़ी चुनौती है क्योंकि पैसे तो आ नहीं रहे हैं और कार्य बहाल होने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है. (भाषा इनपुट के साथ)



First published: June 27, 2020, 7:51 PM IST



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