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ड्रैगन के खिलाफ आसियान देशों का सख्‍त रुख, कहा- दक्षिण चीन सागर में संधि का पालन करे चीन

दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में चीन की हरकतों से आसियान (ASEAN) देश तंग आ गए हैं। एक साझा बयान में इन देशों के नेताओं ने कहा है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र की संधि के हिसाब से समुद्र में संप्रभुता तय होनी चाहिए।

Edited By Deepak Verma | पीटीआई | Updated:

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हाइलाइट्स

  • दक्षिण चीन सागर के बड़े हिस्‍से पर ऐतिहासिक आधार पर दावा करता रहा है चीन
  • वियतनाम, मलेशिया, फिलीपीन और ब्रुनेई जैसे देशों के इलाकों में घुस रहा ड्रैगन
  • दक्षिण चीन सागर के कई टापुओं पर एयरस्ट्रिप भी बना चुका है चीन
  • आसियान देशों ने मिलकर जारी किया बयान, संयुक्‍त राष्‍ट्र की संधि याद दिलाई

मनीला

दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों (ASEAN) के नेताओं ने दक्षिण चीन सागर (South China Sea) को लेकर चीन के खिलाफ सख्‍त टिप्‍पणी की है। सदस्‍य देशों के नेताओं ने कहा कि 1982 में हुई संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के आधार पर दक्षिण चीन सागर में संप्रभुता का निर्धारण किया जाना चाहिए। चीन ऐतिहासिक आधार पर दक्षिण चीन सागर के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है। उसके खिलाफ दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के नेताओं की यह अब तक की सबसे सख्त टिप्‍पणियों में से एक है।

‘समुद्री कानून की संधि को आधार माने चीन’

ASEAN नेताओं ने अपना रुख साफ करते हुए शनिवार को वियतनाम में दस देशों के संगठनों की ओर से बयान जारी किया। कोरोना वायरस के चलते ASEAN नेताओं का शिखर सम्मेलन शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित किया गया। लंबे समय से क्षेत्रीय संप्रभुता को लेकर चल रहा विवाद एजेंडे में शीर्ष पर रहा। आसियान के बयान में कहा गया, ‘‘हम दोहराते हैं कि 1982 में हुई संयुक्त राष्ट्र समुद्री क़ानून संधि समुद्री अधिकार, संप्रभुता, अधिकार क्षेत्र और वैधता निर्धारित करने के लिए आधार है।”

US के तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात

  • US के तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात

    अमेरिका ने पहले ही ताइवान के समीप अपने तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर को तैनात कर दिया है। जिसमें से दो ताइवान और बाकी मित्र देशों के साथ युद्धाभ्यास कर रहे हैं, वहीं तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर जापान के पास गश्त लगा रहा है। अमेरिका ने जिन तीन एयरक्राफ्ट कैरियर को प्रशांत महासागर में तैनात किया है वे यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट, यूएसएस निमित्ज और यूएसएस रोनाल्ड रीगन हैं।

  • अमेरिका यूं ही नहीं भेज रहा सेना

    अमेरिका के पास दुनिया की सबसे आधुनिक सेना और हथियार हैं। दुनियाभर के देशों की सैन्य ताकत का आंकलन करने वाली ग्लोबल फायर पॉवर इंडेक्स के अनुसार 137 देशों की सूची में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के मामले में अमेरिका दुनिया के बाकी देशों से बहुत आगे है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के दुनिया में 800 सैन्य ठिकाने हैं। इनमें 100 से ज्यादा खाड़ी देशों में हैं। जहां 60 से 70 हजार जवान तैनात हैं।

  • एशिया में किन-किन देशों को चीन से खतरा

    एशिया में चीन की विस्तारवादी नीतियों से भारत को सबसे ज्यादा खतरा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण लद्दाख में चीनी फौज के जमावड़े से मिल रहा है। इसके अलावा चीन और जापान में भी पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों को लेकर तनाव चरम पर है। हाल में ही जापान ने एक चीनी पनडुब्बी को अपने जलक्षेत्र से खदेड़ा था। चीन कई बार ताइवान पर भी खुलेआम सेना के प्रयोग की धमकी दे चुका है। इन दिनों चीनी फाइटर जेट्स ने भी कई बार ताइवान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। वहीं चीन का फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया के साथ भी विवाद है।

  • एशिया में 2 लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक

    फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे एशिया में चीन के चारों ओर 2 लाख से ज्यादा अमेरिकी सेना के जवान हर वक्त मुस्तैद हैं और किसी भी अप्रत्याशित हालात से निपटने में भी सक्षम हैं। वहीं चीन की घेराबंदी में अमेरिका और अधिक संख्या में एशिया में अपनी सेना को तैनाक करने की तैयारी कर रहा है। इससे विवाद और गहराने के आसार हैं। जानिए एशिया मे कहां-कहां है अमेरिकी सैन्य ठिकाने-

  • डियेगो गार्सिया से हिंद महासागर पर नजर

    मालदीव के पास स्थित डियेगो गार्सिया में अमेरिकी नेवी और ब्रिटिश नेवी मौजूद है। यह द्वीप उपनिवेश काल से ही ब्रिटेन के कब्जे में है और हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस लोकेशन से चीनी नौसेना की हर एक मूवमेंट पर नजर रखी जा सकती है।

  • जापान में अमेरिका की तीनों सेना मौजूद

    जापान में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही अमेरिकी सेना मौजूद है। एक अनुमान के मुताबिक यहां अमेरिकी नेवी, एयरफोर्स और आर्मी के कुल 10 बेस हैं जहां एक लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिका और जापान में हुई संधि के अनुसार इस देश की रक्षा की जिम्मेदारी यूएस की है। यहां से साउथ चाइना सी पर भी अमेरिका आसानी से नजर रख सकता है।

  • गुआम से उत्तर कोरिया को कंट्रोल करता है US

    प्रशांत महासागर में स्थित इस छोटे से द्वीप पर अमेरिकी सेना की महत्वपूर्ण रणनीतिक मौजूदगी है। इस द्वीप से अमेरिकी सेना न केवल प्रशांत महासागर में चीन और उत्तर कोरिया की हरकतों पर नजर रख सकता है बल्कि उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने और नेवल ब्लॉकेज लगाने में बड़ी भूमिका अदा कर सकता है। यहां 5000 अमेरिकी सैनिकों की तैनाती है।

  • साउथ कोरिया में तैनात है अमेरिकी फोर्स

    उत्तर कोरिया के कोप से बचाने के लिए दक्षिण कोरिया में अमेरिकी फौज तैनात है। जिसमें आर्मी, एयरफोर्स, मरीन कॉर्प और यूएस नेवी के जवान शामिल हैं। यहां से अमेरिका चीन की हरकतों पर भी निगाह रखता है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यहां 28500 ट्रूप्स तैनात हैं।

  • फिलीपींस में भी US बेस, चीन पर नजर

    चीन के नजदीक फिलीपींस में भी अमेरिकी सेना का बेस मौजूद है। हाल मे ही फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे ने अमेरिका के साथ दो दशक पुराने विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA)को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। बता दें कि 2016 में सत्ता में आने के बाद से रोड्रिगो डुटर्टे का झुकाव चीन की तरफ ज्यादा था। जिस कारण अमेरिका से फिलीपीन्स की तल्खियां भी बढ़ी थी।

  • ताइवान में बेस तो नहीं, लेकिन US की उपस्थिति ज्यादा

    ताइवान में अमेरिकी सेना का कोई स्थायी बेस नहीं है, लेकिन यहां अमेरिकी सेना अक्सर ट्रेनिंग और गश्त को लेकर आती जाती रहती है। वर्तमान समय में भी अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट कैरियर इस इलाके में तैनात हैं। अमेरिका शुरू से ही ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थक रहा है। हाल के दिनों में चीन से बढ़ते टकराव के बाद से अमेरिका ने पूर्वी चीन सागर और ताइवान की खाड़ी में अपनी उपस्थिति दर्ज करवानी शुरू कर दी है।

  • अफगानिस्तान में अमेरिका के 14 हजार सैनिक

    अफगानिस्तान में अमेरिका के 14 हजार सैनिक मौजूद हैं। इसके अलावा यहां गठबंधन सेनाओं के आठ हजार सैनिक भी हैं जो तालिबान के खिलाफ अक्सर कार्रवाईयों को अंजाम देते रहते हैं। हालांकि अमेरिका ने हाल के दिनों में अफगानिस्तान में तैनाक अपने सैनिकों की जानकारी नहीं दी है। अमेरिकी सैनिक बड़े पैमाने पर अफगानिस्तान की सेना को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं।

  • इन देशों में भी अमेरिकी सेना तैनात

    सिंगापुरएसेसन द्वीपकजाखिस्तान

चीन के खिलाफ एकजुट हो रहे ASEAN देश

UN की अंतरराष्ट्रीय संधि में देशों के समुद्र पर अधिकार, सीमांकन और विशेष आर्थिक क्षेत्र को परिभाषित किया गया है। दक्षिण चीन सागर में इसी आधार पर मछली पकड़ने और संसाधनों का दोहन करने का अधिकार मिलता है। आसियान के बयान में कहा गया, ‘‘संयुक्त राष्ट्र की समुद्री क़ानून संधि ने कानूनी ढांचा मुहैया कराया है जिसके अंतर्गत सभी समुद्री गतिविधियां होनी चाहिए।’’ चीनी अधिकारी इस बयान पर टिप्पणी करने के लिए तत्काल उपलब्ध नहीं हो सके। दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के तीन राजनयिकों ने बताया कि एशिया में लंबे समय से संघर्ष के केंद्र रहे इस क्षेत्र में कानून का राज स्थापित करने के लिए इस क्षेत्रीय संगठन ने अपने रुख को मजबूत करने का संकेत दिया है।

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वियतनाम के चलते तीखे हुए ASEAN के तेवर

इस साल आसियान संगठन का नेतृत्व कर रहे वियतनाम ने इस अध्यक्षीय बयान का मसौदा तैयार किया है। इसपर चर्चा नहीं होती बल्कि राय-मशविरा के लिए सदस्य देशों को भेजा जाता है। वियतनाम समुद्री विवाद के मुद्दे पर चीन के खिलाफ सबसे मुखर रहा है। चीन ने पिछले कुछ सालों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस समुद्री क्षेत्र पर दावे को लेकर आक्रमक रुख अपनाया है। उसके द्वारा जिन इलाकों पर दावा किया जा रहा है, उससे आसियान सदस्य देशों वियतनाम, मलेशिया, फिलीपीन और ब्रुनेई के क्षेत्र में अतिक्रमण होता है। ताइवान ने भी विवादित क्षेत्र के बड़े हिस्से पर दावा किया है।

सेना का कमाल, चीन बॉर्डर पहुंचाने वाला बैली ब्रिज 6 दिन में फिर तैयारसेना का कमाल, चीन बॉर्डर पहुंचाने वाला बैली ब्रिज 6 दिन में फिर तैयारउत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित मुस्यारी में 6 दिन पहले टूटा बैली ब्रिज दोबारा बनकर तैयार हो गया है। मुन्स्यारी से मिलम जाने वाले रूट पर सेनर नाले पर बना बैली ब्रिज उस वक्त टूट गया था जब सड़क कटिंग के लिए बड़े ट्रक पर पोकलैंड मशीन ले जाई जा रही थी। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने कड़ी मेहनत से सिर्फ 6 दिन में ही नया ब्रिज तैयार कर लिया है। इसे बनाने में बीआरओ को कई विषम भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, मगर बीआरओ ने रात-दिन काम किया और महज 6 दिन के रेकॉर्ड टाइम में ब्रिज बनाकर तैयार कर दिया।

ट्रिब्‍यूनल से खारिज हो चुका चीन का दावा

जुलाई 2016 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने संयुक्त राष्ट्र की समुद्री क़ानून संधि के आधार पर चीन के ऐतिहासिक दावे को अस्वीकार कर दिया था। चीन ने इस सुनवाई में शामिल होने से इनकार कर दिया और फैसले को शर्मनाक करार देते हुए खारिज कर दिया। चीन ने हाल में संबंधित क्षेत्र में मौजूद सात टापुओं को मिसाइल सुरक्षित सैन्य ठिकानों में तब्दील किया है जिनमें से तीन द्वीपों पर सैन्य हवाई पट्टी भी बनाई गई है और वह लगातार इसका विकास कर रहा है जिससे प्रतिद्वंद्वी देशों की चिंता बढ़ गई है। चीन के इस कदम से अमेरिका के एशियाई और पश्चिमी सहयोगी भी चिंतित हैं।

चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)

चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)

Web Title asean takes strong position against cpc claims over south china sea(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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