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Mumbai News : गूगल पर लोग खोज रहे कोरोना की दवाई और वैक्सीन, हांफने लगा सर्च इंजन

ओमसिंह राजपुरोहित
पुणे. कोरोना महामारी से पूरी दुनिया त्रस्त है। ऐसे में स्वास्थ्य से जुड़े जितने भी रिसर्च सेंटर हैं, अधिकतर कोरोना की दवा या वैक्सीन तैयार करने में लगे हैं। संक्रमितों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। अधिकांश लोग महामारी से बचाव के लिए कारगर दवाई या कोविड-19 रोधी वैक्सीन इंटरनेट पर खोज रहे हैं। ऐसे लोगों की कमी नहीं, जो यह जानने के लिए इंटरनेट खंगाल रहे कि कोरोना रोधी वैक्सीन कैसे बनाई जा सकती है। बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो कोरोना से बचाव में कारगर दवाई भी खोज रहे। दिलचस्प यह कि कोरोना से जुड़ीं सूचनाएं मुहैया कराने में सर्च इंजन गूगल हांफने लगा है।

देश में कोरोना का पहला मरीज 30 जनवरी को केरल में मिला था। मार्च-अप्रेल से गूगल पर इंटरनेट उपयोक्ताओं की सर्फिंग तेजी से बढ़ी। ज्यादातर लोग यही जानना चाहते हैं कि घर बैठे कोरोना का उपचार कैसे कर सकते हैं। जैसे-जैसे समय बढ़ रहा है, वैसे-वैसे गूगल पर ट्रैफिक बढ़ रही है। जुलाई के पहले पखवाड़े के आंकड़े पसीने छुड़ाने वाले हैं।

हाउ टू ट्रीट कोविड एट होम
यह वह सवाल है, जिसका जवाब सबसे ज्यादा लोग गूगल से जानना चाहते हैं। अधिकतर सर्च पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश से हैं। घर पर कोरोना रोधी वैक्सीन बनाने का तरीका लगभग सभी रायों के यूजर्स ने खोजा है। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, गुजरात, जम्मू एवं कश्मीर में इसके सर्च ज्यादा हैं। कोविड-19 रोधी वैक्सीन को लेकर हमारी दिलचस्पी इससे जाहिर होती है कि मई, जून और जुलाई (अब तक) के टॉप की-वड्र्स में यह एक है।

सच में क्या यह संभव है
किसी जड़ी-बूटी या सामान्य फॉर्मूले का टेस्ट तो घर पर किया जा सकता है। आमतौर पर दवा जटिल यौगिक होती है, जो तरह-तरह के तत्वों को मिलाकर बनती है। घर पर वैक्सीन बना पाना असंभव है। इसके लिए जो रिसर्च फैसिलिटी चाहिए, वह सिर्फ बड़ी रिसर्च लैब में ही मिल सकती है। हकीकत से अनजान लोगों ने गूगल से पूछा कि क्या कोविड-19 रोधी वैक्सीन घर पर बनाई जा सकती है।

ऐसे सर्च की खास वजह
कोरोना संक्रमण ऐसी बीमारी के रूप में उभरा है, जिसके मरीजों को समाज में हीनता की नजर से देखा गया है। ऐेसे कई मामले हैं, जहां उपचार से ठीक होकर आए मरीजों को रहवासी सोसायटियों में प्रवेश नहीं दिया गया। मनोचिकित्सक मानते हैं कि कई मरीज संक्रमित होने के बावजूद इसलिए सामने नहीं आते क्योंकि उन्हें सोशल बायकॉट का डर है। इसलिए घर पर ही कोरोना के इलाज, दवा और वैक्सीन बनाने को लेकर लोग सर्च कर रहे हैं।



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