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सुशांत के पिता ने SC से कहा, मैं पटना से हूं और मेरे बेटे के बिना मेरी चिता को रोशन करने वाला कोई नहीं

जस्टिस ऋषिकेश रॉय की बेंच में रिया चक्रवर्ती की ओर से पेश हुए वकील श्याम दीवान ने कहा, “यह ट्रांसफर के लिए एक आवेदन है और हमारी संक्षिप्त दलील यह है कि जहां तक सुशांत के पिता द्वारा दर्ज की गई FIR का सवाल है, इसका पटना से कोई लेना-देना नहीं… राज्य द्वारा भी काफी हस्तक्षेप है, जिसका मतलब है कि पूर्वाग्रह की आशंका है… FIR पटना में दर्ज की गई, जबकि वहां घटना हुई ही नहीं थी… FIR 38 दिन की देरी से दर्ज करवाई गई… अगर मामला पटना से मुंबई ट्रांसफर नहीं होता, तो रिया को इंसाफ नही मिल पाएगा…”

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रिया चक्रवर्ती के वकील ने कहा, “बिहार से चार सदस्यों की पुलिस टीम भी गई… इसके बाद बिहार ने CBI को मामला सौंपने की मांग की और केंद्र ने सौंप भी दिया… पटना में घटना के 38 दिन बाद FIR करवाना गलत है… न्याय तभी पूरा होगा, जब अधिकार क्षेत्र केवल मुंबई पुलिस के पास रहे… FIR करने का क्षेत्राधिकार ही बिहार पुलिस के पास नहीं… बिहार में जो FIR दर्ज हुई, वह ज़ीरो FIR ही है, जिसे बिहार पुलिस को खुद ही ट्रांसफर कर देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया… जबकि कानून और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए फैसले में ज़ीरो FIR का ट्रांसफर उस क्षेत्र की पुलिस को करना अनिवार्य है, जहां घटना हुई है…”

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श्याम दीवान ने कहा, “इस मामले में पूर्वाग्रह की गंभीर आशंका है… FIR दर्ज किए जाने के पीछे की वजह राजनैतिक है… बिहार पुलिस ने एक ऐसे मामले के लिए FIR दर्ज की है, जिसका पटना से कोई कनेक्शन ही नहीं है… रिया को सुशांत से प्यार था और उसकी मौत के बाद वह गंभीर आघात में थी – उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रोल किया जा रहा है… रिया खुद परेशान थी, उसने ट्वीट कर निष्पक्ष जांच की मांग की… लोगों ने उसे काफी कुछ कहा, धमकियां दीं… मुंबई पुलिस हर कोण से जांच कर रही है, प्रोफेशनल तरीके से जांच हो रही है – 56 लोगों के बयान दर्ज हो चुके हैं…”

रिया के वकील श्याम दीवान ने कहा कि मुझे लगता है कि जांच काफी आगे बढ़ गई है. मुंबई पुलिस का दृष्टिकोण यह है कि याचिकाकर्ता के लिए पटना में प्राथमिकी दर्ज करना आवश्यक नहीं था. दीवान ने कहा कि शिकायतकर्ता का निवास पटना में होने के अलावा घटना और जांच का पटना से कोई संबंध नहीं है. केके सिंह ये स्पष्ट रूप से जानते थे. उनके हलफनामे में मुंबई में की जा रही जांच का भी उल्लेख है. हमारे द्वारा ट्रांसफर याचिका दायर करने के बाद, बिहार के राज्यपाल ने इस मामले को सीबीआई को भेज दिया. 

रिया के वकील ने कहा कि कार्यपालिका ऐसा काम नहीं कर सकती जो सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को शून्य कर दे. अगर सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि सीबीआई को ट्रांसफर करने का आदेश दिया जाना चाहिए, तो सुप्रीम कोर्ट को ऐसा करना चाहिए. लेकिन यह बिहार सरकार के माध्यम से नहीं किया जा सकता है. मामला राजनीति से प्रेरित है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मंत्री संजय झा के हस्तक्षेप पर पटना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की. राजनीतिक फायदे के लिए इस मामले की तूल दिया जा रहा है. बड़े राजनीतिक नतीजों को देखते हुए, मुंबई पुलिस को ट्रांसफर के लिए हमारे अनुरोध पर अनुमति दी जानी चाहिए. हमने कभी ऐसा मामला नहीं देखा है जहां एक मुख्यमंत्री को एफआईआर दर्ज करने के लिए कहना पड़े. बड़े पैमाने पर मीडिया ट्रायल चल रहा है.

रिया के वकील ने दलील पूरी की. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने श्याम दीवान से पूछा कि आपकी याचिका में ही सीबीआई जांच का संदर्भ है. क्या आप चाहते हैं कि सीबीआई इस मामले की जांच करे या नहीं? श्याम दीवान ने कहा कि मैं एक निष्पक्ष जांच एजेंसी द्वारा निष्पक्ष जांच चाहता हूं. दीवान ने कहा कि लड़की को मृतक से प्यार था और साथ में रहती थी. वह पूरी निष्पक्षता की हकदार है, लेकिन टीवी चैनलों पर बहस एक गंभीर चिंता का विषय है. मीडिया द्वारा समानांतर ट्रायल अवांछनीय है. इस मामले का बाहरी रूप से उपयोग किया जा रहा है क्योंकि लड़के और लड़की के रिश्ते के मामले में एक सीएम को हस्तक्षेप करना पड़ा. श्याम दीवान ने कहा कि पहले FIR को पटना से महाराष्ट्र ट्रांसफर किया जाए अगर महाराष्ट्र सरकार सीबीआई जांच कराने को लेकर तैयार है तो वो भी सीबीआई जांच के लिए तैयार हैं. 

सुप्रीम कोर्ट ने श्याम दीवान से पूछा कि आपके पास सीबीआई में जाने के तरीके के खिलाफ आरक्षण है. हो सकता है कि आप पीड़ित की तरह महसूस कर रहे हों, जिस तरह से मीडिया रिपोर्टिंग कर रहा है. लेकिन आप निष्पक्ष जांच भी चाहते हैं. क्या वह सही है? वकील ने कहा हां. 

बिहार के वकील मनिंदर सिंह ने बहस शुरू की. सिंह ने कहा कि मुम्बई पुलिस ने बिना FIR दर्ज किए 56 लोगों के बयान दर्ज कर लिए. बिहार ने कहा कि‌ राज्य पुलिस इस‌ मामले में तब आगे आई जब लंबे समय तक मुंबई पुलिस ने कोई एफआईआर ‌दर्ज नहीं की. बिहार सरकार ने कहा कि जब आत्महत्या ‌और हत्या के बीच‌ की आशंका को महाराष्ट्र पुलिस ने स्वीकार किया था तो एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की. सिंह ने कहा कि FIR दर्ज करने में बिहार सरकार की तरफ से देरी नहीं हुई है बल्कि मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस को जांच में सहयोग नहीं किया. इस मामले में सिर्फ एक FIR दर्ज है और वो हमारी है. इस मामले में राजनीतिक दबाव मुंबई पुलिस पर है कि वो जांच न करे.

बिहार के वकील ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस ने मामले से जुड़े एक भी कागजात को बिहार पुलिस के साथ शेयर नहीं किया. महाराष्ट्र पुलिस इस मामले में किसको बचाना चाहती है? महाराष्ट्र पुलिस ने बिहार के सीनियर जांच अधिकारी को क्वारंटाइन कर दिया. क्या महाराष्ट्र पुलिस की यह कार्रवाई तर्कसंगत है? बिहार सरकार ने महाराष्ट्र पुलिस पर राजनैतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया. कहा कि बिहार पुलिस की जांच में मुंबई पुलिस ने कोई सहयोग नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में विचार करने की जरूरत है. 

बिहार ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस की जांच सिर्फ एक ‘मुखौटा’ है. वे इस मामले में क्या छिपा रहे हैं? मौत का कारण पता चलने पर पुलिस को या तो मामला बंद करना होगा या एफआईआर दर्ज करनी होगी. लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की है. मुंबई पुलिस 25 जून के बाद कुछ नहीं कर सकी जब सुशांत के पोस्टमॉर्टम की फाइनल रिपोर्ट आ गई. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद इंक्वेस्ट कार्यवाही समाप्त होनी थी. तो अब मुंबई पुलिस की जांच पूरी हो चुकी है. महाराष्ट्र ने इतने लोगों की जांच करने के बावजूद कोई एफआईआर दर्ज नहीं की. बिहार सरकार ने कहा कि FIR दर्ज करना हमारी जिम्मेदारी थी जो हमने निभाई. जहां तक बात है अधिकार क्षेत्र की, वो जांच पूरी होने के बाद ही देखा जा सकता है.

बिहार सरकार के वकील ने कहा कि महाराष्ट्र में बिना किसी एफआईआर के क्या जांच चल रही है? आखिर महाराष्ट्र पुलिस क्या छुपा रही है? मनिंदर सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र के सामने कुछ भी लंबित नहीं है. 25 जून के बाद वे जो कुछ भी कर रहे हैं वह अवैध है. जब संज्ञेय अपराध की हमें सूचना मिलती है तो हम एफआईआर दर्ज करने के लिए बाध्य होते हैं. रिया की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. रिया ने तो खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सीबीआई जांच की मांग की थी.

महाराष्ट्र की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें शुरू कीं. सिंघवी ने  कहा कि बिहार पुलिस के पास कोई क्षेत्राधिकार नहीं है. यह ट्रांसफर का मामला नहीं है. इसमें अब सीबीआई जांच की बात है. हमारी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सीलबंद कवर में दाखिल की गई है. सीआरपीसी की हत्या का प्रयास किया जा रहा है. बिहार सरकार अपने हलफनामे में कहती है कि सुशांत सिंह राजपूत बिहार का था. बाद में अपने हलफनामे में वे कहते हैं कि सबूत और आरोपी मुंबई या शेष भारत में हो सकते हैं. 

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि देश में संघीय ढांचा है. क्या शिकायतकर्ता की सुविधा के लिए कहीं भी केस दर्ज कर लिया जाएगा? इस केस में हर कोई वकील और जज बन गया है. कोई कह रहा है कि आत्महत्या है, कोई हत्या. पता नहीं ये आत्महत्या है या नहीं, लेकिन यह तय है कि मामले में सीआरपीसी की हत्या हो रही है. एक ट्रांसफर याचिका को इतना सनसनीखेज बनाया जा रहा है. हर एंकर और रिपोर्टर एक्सपर्ट बन गए हैं. इसका नतीजा जांच और सच्चाई भुगत रहे हैं. मीडिया इस सामान्य केस को असामान्य केस बना रही है. अगर बिहार पुलिस द्वारा हस्तक्षेप की अनुमति दी जाती है, तो यह संघवाद की हत्या होगी. सीबीआई को बीच में नहीं आना चाहिए था. अगर पीड़ित, आरोपी मुंबई पुलिस को पसंद नहीं करते तो क्या वो मामला दर्ज करने के लिए केरल या कर्नाटक पुलिस को लिख सकते हैं? यह संघवाद पर एक मौलिक हमला है. अभियुक्तों, पीड़ितों की राय कानून के मूलभूत सिद्धांतों को नहीं बदल सकती.

सिंघवी ने कहा कि ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि बिहार में चुनाव हैं. चुनाव के बाद इस मामले में कुछ नहीं सुनेंगे. क्या मैं कुछ ऐसा ट्रांसफर कर सकता हूं जो मेरे पास नहीं है? बिहार कुछ ऐसा स्थानांतरित करने में बेहद उदार है जिसमें उसका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है. दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम में कानून की धारा 6 क्यों है? राज्य की सहमति का तत्व क्यों है? कानून कहता है “राज्य की असीम क्षमता.” सब कुछ मुंबई में है, पिता बिहार में रहते हैं और बहन चंडीगढ़ में रहती है. राज्य की सहमति का एक मात्र अपवाद ये है कि अगर  सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष है कि “असाधारण परिस्थितियां” हैं, तब सुप्रीम कोर्ट जांच स्थानांतरित कर सकता है. 

सुप्रीम कोर्ट में रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुनवाई के दौरान हल्के- फुल्के पल भी आए. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि महाराष्ट्र के लिए सिंघवी सीलबंद कवर में जांच रिपोर्ट पर भरोसा कर रहे हैं. सिंघवी ने कहा कि वो व्यक्ति (मेहता) इस पर टिप्पणी कर रहे हैं जो सील कवर पर सबसे अधिक भरोसा करते हैं. उनको तो सीलबंद कवर का विरोध नहीं करना चाहिए. सिंघवी ने कहा कि मेरे सील कवर और तुषार मेहता के सील कवर के बीच काफी अंतर है. इससे पहले सिंघवी ने चिदंबरम की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में दी गई सीलबंद कवर रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी. 

सिंघवी ने बिहार के वकील की दलीलों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि पीएम रिपोर्ट दाखिल करने से इन्क्वारी खत्म नहीं होती. ये गलत व्याख्या है. पीएम रिपोर्ट दर्ज होने के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं तो जांच खत्म हो जाएगी. आपके पास हर जगह से चीखने-चिल्लाने, सुर्खियां बटोरने वाले एंकर हो सकते हैं. हर तरफ से कमेंट आ सकते हैं, लेकिन इससे कानून में बदलाव नहीं होता है. कोर्ट को कानून को देखना चाहिए. यह मुंबई पुलिस और बिहार पुलिस के बारे में नहीं है, यह संघवाद और अधिकार क्षेत्र के बारे में है. सिंघवी की दलीलें पूरी हुईं.

सुशांत सिंह के पिता की तरफ से वकील विकास सिंह ने बहस शुरू की. विकास सिंह ने जीरो एफआईआर के मामले में आसाराम केस का हवाला देते हुए कहा कि पीड़िता राजस्थान से आई थी और शिकायत दिल्ली में दर्ज करवाई गई थी. इसके बाद मामले में जांच की गई थी. विकास सिंह ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के बेटे का नाम आया है, इस पर विचार की जरूरत है. सीआरपीसी की हत्या कौन कर रहा है ये साफ है. सीआरपीसी में लिखित शिकायत की कोई आवश्यकता नहीं है. हमने मुंबई पुलिस से शिकायत की थी. पूरा मामला यह है कि पिता और बहनों को अलग कर दिया गया. बेटे के साथ जो हो रहा था उस पर पिता के बार-बार अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया गया. मुंबई पुलिस पूरे बॉलीवुड पर सवाल उठा रही है लेकिन मौत के कारणों में नहीं जा रही. मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या घोषित कर दिया है. यह रिया है जिसके पास घर की चाबी थी, जो नौकरों को नियंत्रण में रखती थी. 

विकास सिंह ने कहा कि वो इस मामले में फेयर जांच चाहते हैं. उन्हें मुम्बई पुलिस पर भरोसा नहीं है. मुंबई पुलिस जांच को अलग दिशा में ले जा रही है. चूंकि मुंबई पुलिस ने इसे खुदकुशी कहा तो हमने इसमें खुदकुशी के लिए उकसाने की शिकायत की. अगर वो इसे हत्या कहती तो हम कहते कि इसी व्यक्ति ने ये किया है. मुंबई पुलिस ने इस मामले में सबसे पूछताछ की लेकिन मुख्य आरोपी से नहीं की. डेडबॉडी पर जो निशान थे वो बेल्ट के हो सकते हैं. रिया, जो सब कुछ कंट्रोल कर रही थी उससे पूछताछ होनी चहिए थी लेकिन मुंबई पुलिस कुछ और ही कर रही थी. 

विकास सिंह ने कहा कि मुंबई में 3 अगस्त को जानबूझकर क्वारंटाइन नियमों को बदल दिया और सरकारी अधिकारियों को आधिकारिक ड्यूटी पर दी गई छूट को हटा दिया. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन्हें पता था कि सीबीआई के अधिकारी किसी भी दिन आने वाले हैं. 

केंद्र के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामले के मेरिट में नहीं जा रहे हैं. सीबीआई ने बिहार सरकार की सिफारिश को स्वीकार करने और जांच कराने का निर्णय पहले ही ले लिया है. महाराष्ट्र के हलफनामे में 

एक भ्रामक बयान है- चाहे जानबूझकर या अनजाने में. इसमें कहा गया है कि मुंबई पुलिस ने एक आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की. 174 सीआरपीसी के तहत मौत की जांच. इसके बाद जांच की गई लेकिन s174 / 175 CrPC के तहत “जांच” नहीं हो सकती. यह कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत है. मेहता ने कहा कि मुंबई में न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई है और ना ही और कोई जांच शुरू हुई है. 

सुशांत के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मैं पटना से हूं और मेरे बेटे के बिना मेरी चिता को रोशन करने वाला कोई नहीं है. इससे खुद पता चलता है कि पटना में अधिकार क्षेत्र है. जब रिया भी सीबीआई जांच चाहती है, तो इस अदालत को सीबीआई जांच पर अपनी मुहर लगा देनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि सीबीआई अधिकारियों को क्वारंटाइन में न रखा जाए. 

SG तुषार मेहता ने कहा कि हम यह नहीं जानते कि रिया एक अभियुक्त है, गवाह है या मामले में पीड़ित है. लेकिन उसने केस को ट्रांसफर करने के लिए इस अदालत में याचिका दाखिल की है. लेकिन केस है कहां जो ट्रांसफर किया जाए. जब सुशांत के‌ पोस्टमार्टम में चोट‌ और अन्य परिस्थितिजन्य‌ साक्ष्य आशंका को बढ़ा रहे थे तो मुंबई पुलिस ने तत्काल एफआईआर‌ दर्ज क्यों नहीं की? मुंबई में कोई केस नहीं दर्ज हुआ. ऐसे में बिहार में दर्ज एफआईआर ट्रांसफर करने का कोई मतलब नहीं है, जबकि मुंबई पुलिस का लापरवाह रवैया साफ है. मुंबई पुलिस द्वारा 56 लोगों के बयान दर्ज किए गए जिसका कानूनी तौर पर कोई मतलब नहीं है. 

केंद्र के वकील तुषार मेहता ने कहा कि CrPC 174 के तहत शुरू दुर्घटना में मौत की जांच बहुत कम समय तक चलती है. बॉडी देखकर और स्पॉट पर जाकर देखा जाता है कि मौत की वजह संदिग्ध है या नहीं. फिर FIR दर्ज होती है. मुंबई पुलिस जो कर रही है, वह सही नहीं है. जांच केवल बिहार वाली FIR पर हो रही है. FIR दर्ज करने पर सवाल हो सकते है लेकिन मुम्बई में कोई जांच नही हो रही है.

मेहता ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने सीलबंद कवर में क्या दिया है, यह जांच का विवरण नहीं है. वे बयानों को अनधिकृत तरीके से रिकॉर्ड कर रहे हैं. प्रवर्तन निदेशालय पहले से ही जांच कर रहा है. एक बार एक केंद्रीय एजेंसी पर मामला दर्ज हो जाने के बाद, एक अन्य केंद्रीय एजेंसी (CBI) को शामिल किया जाना चाहिए. 

वीडियो: मीडिया ट्रायल करके मुझे दोषी ठहराया जा रहा : रिया

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