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रूस का कोविड-19 वैक्सीन बनाने का दावा, एम्स के निदेशक ने कहा- यह देखना होगा कि क्या यह सुरक्षित और प्रभावी है

रूस कोरोना वायरस (COVDI-19) की वैक्सीन का पंजीकरण कराने वाला दुनिया पहला देश बन गया है। रूस द्वारा कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के दावे पर मंगलवार को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि यदि रूस की वैक्सीन सफल रही तो हमें यह देखना होगा कि क्या यह सुरक्षित और प्रभावी है। भारत में बड़े पैमाने पर वैक्सीन के उत्पादन की क्षमता है। 

डॉ. गुलेरिया ने कहा कि भारत और इजरायल संबंध काफी मजबूत हैं। इससे पहले, भारत ने दवाओं और सुरक्षा उपकरणों के जरिये इजरायल की मदद की है। अब इजरायल ने रोबोटिक टेली कंसल्टेशन और टेलीमॉनिटरिंग उपकरण सहित उपकरण भेजे हैं।

इजरायल-भारत सहयोग के रूप में इजरायली दूतावास ने कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए दिल्ली एम्स को अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रौद्योगिकियों और उच्च-अंत उपकरण प्रदान किए हैं।  

रूस : पुतिन की बेटी को लगाया गया कोविड-19 का टीका

बता दें कि, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को सरकारी बैठक में यह जानकारी देते हुए कहा कि जहां तक मुझे पता है रूस कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने वाला आज दुनिया का पहला देश बन गया है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि हमें भरोसा है कि हम निकट भविष्य में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करेंगे। यह बहुत महत्वपूर्ण है। 

रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने रूस के माइक्रोबायोलॉजी शोध केंद्र गेमालेया की वैक्सीन पंजीकृत किए जाने की पुष्टि की है। स्वास्थ्य मंत्री श्री मुराशको ने बताया कि वैक्सीन सुरक्षित और कारगार है।  

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि देश में विकसित कोविड-19 टीके का पंजीकरण कर लिया गया है और एक टीका उनकी बेटी को पहले ही लगाया जा चुका है। पुतिन ने कहा कि टीका ट्रायल में खरा उतरा है और कोरोना वायरस के खिलाफ मानव की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सफल रहा है।

उन्होंने रेखांकित किया कि टीका परीक्षण के आवश्यक चरणों से गुजरा है। उनकी दो बेटियों में से एक को यह टीका दिया गया है और वह अच्छा महसूस कर रही है। रूस के अधिकारियों ने कहा है कि टीका सबसे पहले चिकित्सा कर्मियों, शिक्षकों और जोखिम की जद वाले समूहों से जुड़े लोगों को लगाया जाएगा।

रूस कोविड-19 टीके का पंजीकरण करने वाला पहला देश है। दुनियाभर में अनेक वैज्ञानिक इस कदम को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं और तीसरे चरण के ट्रायल से पहले टीके का पंजीकरण करने के निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं। किसी भी टीके का तीसरे चरण का ट्रायल आम तौर पर हजारों लोगों पर महीनों तक चलता है। 



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