Home दुनिया भारत ने चीन के इरादों को मालदीव में कैसे दिया बड़ा झटका?

भारत ने चीन के इरादों को मालदीव में कैसे दिया बड़ा झटका?

भारत में चीन लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. लद्दाख (Ladakh) स्थित बॉर्डर पर तनाव (India-China Border Tension) के चलते भारत और चीन के बीच हर तरह की प्रतिस्पर्धा पर बारीक नज़र रखी जा रही है. दूसरी तरफ, रणनीतिक, व्यापारिक और कूटनीतिक अहमयित वाले महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (Belt & Road Initiative) के मोर्चे पर भी चीन के लिए लगातार बुरी खबरें बनी हुई हैं. प्रोजेक्ट को लेकर जो होड़ चीन ने लगा रखी है, उसके जवाब में भारत ने एक बड़ी बाज़ी मार ली है.

इस होड़ से अलग एक मुद्दा हिंद महासागर (Indian Ocean) में वर्चस्व की लड़ाई का भी है. चीन काफी समय से कोशिश कर रहा है कि हिंद महासागर में भारत के वर्चस्व को खत्म या किसी तरह कम किया जा सके. यहां अमेरिका की मौजूदगी इशारा है कि यह क्षेत्र कितना महत्वपूर्ण है. इस इलाके में एक बड़ा कनेक्टिविटी कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट (Maldives Project) भारत के हाथ लगना बड़ी जीत है क्योंकि इस पर चीन लार टपका रहा था. जानिए कैसे भारत ने मालदीव में चीन को झटका दिया है.

भारत और मालदीव के विदेश मंत्री.

क्या है चीन का चर्चित BRI प्रोजेक्ट?‘एक बेल्ट एक सड़क’ (OBOR) के नाम से पहले चर्चा में रहा BRI चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए 2013 से ही अर्थव्यवस्था के लिए समुद्री सिल्क रूट की तरह है. इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी और व्यापार तो हैं ही, लेकिन इस प्रोजेक्ट की महत्वाकांक्षा एशिया, यूरोप, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बीच सांस्कृतिक अदला बदली, वि​त्तीय एकीकरण, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग की भी है.

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यह कितने बड़े पैमाने का प्रोजेक्ट है? अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा प्रोजेक्ट दुनिया में पहले कभी नहीं देखा गया. साल 2027 तक इस प्रोजेक्ट पर 1.2 से 1.3 ट्रिलियन डॉलर की लागत आ जाने की संभावनाएं हैं. इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि इस प्रोजेक्ट के दायरे में करीब 4.4 अरब की आबादी और 21 ट्रिलियन डॉलर की सम्मिलित जीडीपी आ जाती है. और यह बताने की ज़रूरत नहीं कि आपसी सहयोग और व्यापार की आड़ में चीन का मकसद इस प्रोजेक्ट से क्या हो सकता है.

कैसे लटक गया है चीन का यह प्रोजेक्ट?
एकाधिकारवाद, विस्तारवाद, मर्यादा उल्लंघन, अतिक्रमण और हाल में कोरोना वायरस महामारी के प्रायोजक की छवि रखने वाले चीन को कुछ समय से BRI के पर्याय के तौर पर भी पहचाना जा रहा है. यह चीन के लिए तो है ही, दुनिया के लिए भी बड़ी अहमियत वाला प्रोजेक्ट है. लेकिन, इस साल की शुरूआत से ही दुनिया भर में भयावह महामारी के तौर पर फैले कोरोना वायरस ने इस प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचाया है.

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर, कंबोडिया के स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन, बांग्लादेश मे पायरा पावर प्लांट और श्रीलंका में पोर्ट सिटी विकास प्रोजेक्ट को महामारी के चलते पहले ही झटका यूं लग चुका है कि ये काम रुक गए हैं. वहीं, महामारी के प्रकोप के चलते अफ्रीका ने 100 करोड़ डॉलर के बेलआउट और कर्ज़ माफी की मांग की है क्योंकि चीन से अफ्रीकी देशों को 2000 से 2017 के बीच 143 अरब डॉलर का कर्ज़ मिला.

वहीं, दक्षिण एशिया की बात करें तो खबरों के मुताबिक मालदीव ने चीन से कर्ज़ को लेकर नए सिरे से सैटलमेंट करना चाहा तो बांग्लादेश ने भी चीन से गुज़ारिश की कि वो उसे भुगतान देर से करने की मोहलत दी जाए. चीन की हालत समझी जा सकती है. ऐसे में, हिंद महासागर में भारत की एक बढ़त चीन के लिए एक और झटका है.

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मालदीव में भारत के हाथ लगा प्रोजेक्ट
चीनी महत्वाकांक्षाओं पर प्रहार करते हुए भारत ने मालदीव में कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट हासिल कर लिया है. इस प्रोजेक्ट के लिए चीन और भारत में होड़ लगी हुई थी. ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की कुल लागत 40 करोड़ डॉलर की होगी, जिसके तहत मालदीव की राजधानी माले से उसके पड़ोसी तीन द्वीप विलिंगली, गल्हीफाहू और थिलाफुशी जुड़ जाएंगे. इन्हें जोड़ने के लिए 6.7 किलोमीटर लंबा एक ब्रिज और कॉज़वे लिंक का कंस्ट्रक्शन होगा.

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एस जयशंकर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट.

गल्हीफाहू में भारतीय LoC के तहत एक पोर्ट बनाया जाएगा और थिलाफुशी में एक नया औद्योगिक ज़ोन. पोर्ट प्रोजेक्ट की लागत 30 करोड़ डॉलर के आसपास होगी और मालदीव पहले ही कह चुका है कि इसके लिए फंड भारत के एग्ज़िम बैंक के ज़रिये जुटाए जाएंगे.

क्यों अहम है ये प्रोजेक्ट?
इस प्रोजेक्ट से मालदीव और भारत दोनों को आपसी फायदे होंगे. माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट से माले कमर्शियल पोर्ट काफी सुगम हो जाएगा और 40 हज़ार निर्वासितों को रहने की जगह मिल जाएगी. इसके साथ ही, आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन, रोज़गार के क्षेत्रों में भी दोनों देशों को फायदे मिलेंगे. हिंद महासागर में जो द्वीप कोविड 19 संकट से जूझ रहे हैं, उनकी मदद के लिए भारत ने 25 करोड़ डॉलर की मदद का प्रावधान बजट में किया था.

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मालदीव को भारत खासी तवज्जो देने वाला है. कल यानी मंगलवार से ही यहां एयर बबल शुरू हो सकता है, जिसकी घोषणा भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की थी. उन्होंने कहा था कि मालदीव के लिए सीधे कार्गो फेरी और एयर बबल शुरू किया जाएगा. हालांकि पहले चीन को म्यामांर, श्रीलंका सहित मालदीव में अहम प्रोजेक्ट मिल चुके थे, लेकिन अब BRI के तहत चीन मालदीव दोस्ती ब्रिज के जवाब में भारत का य​ह निवेश चीन को तगड़ा जवाब समझा जा रहा है.

भारत के गेटवे हाउस रिसर्च के मुताबिक मालदीव में कई हाउसिंग प्रोजेक्टों, पावर प्लांट, एक ब्रिज, पानी और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में कुल मिलाकर चीन का निवेश डेढ़ अरब डॉलर का है. रिपोर्ट के मुताबिक चीन हिंद महासागर के देशों में बड़े निवेश कर भारत को घेरने के लिए ​कर रहा है.



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