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ब्रिटेन: साल के आखिर तक बन सकती हैं ये दो कोरोना वैक्सीन, जानें सबसे पहले किसे मिलेंगी

कई आशंकाओं और सवालों के बीच रूस ने अपनी कोरोना वायरस वैक्सीन Sputnik-V का ऐलान कर दिया। भले ही लोग इसे लेकर अभी भी आश्वस्त न हों, दो और वैक्सीनें हैं जिनके इस साल के आखिर तक उपलब्ध होने की थोड़ी उम्मीद है। ब्रिटेन की वैक्सीन टास्कफोर्स केट बिंघम ने स्काई-न्यूज से बताया है कि साल के अंत तक दो वैक्सीन बनने की संभावना है जिनमें से एक Oxford University की वैक्सीन और दूसरी जर्मनी की कंपनी BioNTech की वैक्सीन है। हालांकि, ज्यादा संभावना है कि ये अगले साल की शुरुआत में आएं लेकिन बिंघम का कहना है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो ये साल के अंत तक आ भी सकती हैं।

इन दो वैक्सीन से उम्मीदें

बिंघम ने कहा है, ‘मुझे लगता है कि हमारे पास इस साल वैक्सीन मिलने का मौका है। दो संभावित कैंडिडेट हैं- एक ऑक्सफर्ड की और दूसरी BioNTech की जर्मन वैक्सीन।’ उन्होंने कहा कि ये दोनों ऐसी हैं कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो इन्हें बनाकर इस साल डिलिवर किया जा सकता है। ऑक्सफर्ड और AstraZeneca की वैक्सीन इस रेस में सबसे आगे मानी जाती रही है। हालांकि, रूस ने अपनी वैक्सीन को रजिस्टर करा लिया है और चीन ने अभी एक वैक्सीन का पेटेंट करा लिया है।

किसे दी जाएगी

बिंघम ने यह भी बताया कि बुजुर्ग लोगों को युवाओं से अलग वैक्सीन दिए जाने की भी संभावना है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। वैक्सीन दिए जाने पर 65 की उम्र के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, दूसरी बीमारियों से ग्रस्त लोगों, फ्रंटलाइन हेल्थ और सोशल केयर वर्कर्स को भी यह पहले दी जाएगी।

ट्रायल में हिस्सा लेना इसलिए जरूरी

बिंघम ने इसलिए इन लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में ट्रायल के लिए रजिस्टर करने की भी अपील की है। उन्होंने कहा है कि सिर्फ स्वस्थ्य युवाओं पर ट्रायल नहीं किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करना होगा कि ब्रिटेन में क्षेत्रीय, शारीरिक स्वास्थ्य और उम्र की विविधता के हिसाब से यह टेस्ट किया जाए कि हर किसी के लिए वैक्सीन असरदार और सुरक्षित है।

ऐंटी-वैक्सिनेशन कैंपेन से नुकसान

दरअसल, अभी तक ऐसे सिर्फ 6% लोगों ने ही रजिस्टर किया है। बिंघम ने बताया है कि लोगों को आशंका रहती है। साथ ही ऐंटी-वैक्सिनेशन कैंपेन का भी असर पड़ता है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया है कि इन ट्रायल के पीछे मकसद सिर्फ असरदार और सुरक्षित वैक्सीन खोजना है। पश्चिमी देशों में बड़ी संख्या में लोग वैक्सिनेशन के खिलाफ हैं। उनका दावा है कि बड़ी कंपनियां और सरकारें इनके जरिए लोगों को धोखा देती हैं।

चीन की पहली कोरोना वैक्‍सीन को मिला पेटेंट

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