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सऊदी अरब के लिए पाकिस्तान के बदले भारत इतना ख़ास कैसे हुआ?

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पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने सोमवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में कई शीर्ष सऊदी अधिकारियों से मुलाक़ात की है.

कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की नीतियों की वजह से इस समय सऊदी और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव महसूस किया जा रहा है. सेना प्रमुख के दौरे को इस तनाव को कम करने की कोशिश के तौर पर ही देखा जा रहा है.

पाकिस्तान चाहता है कि सऊदी अरब विवादित क्षेत्र कश्मीर के मामले में भारत के रुख़ पर सख़्त रवैया अपनाए. सऊदी अरब ने हाल ही में पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद को रोकने की घोषणा की थी जिससे पाकिस्तान के लिए हालात मुश्किल हो रहे हैं.

पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा है कि जनरल क़मर जावेद बाजवा का सऊदी दौरा सैन्य मामलों से जुड़ा है. लेकिन पाकिस्तानी सेना और सरकार से जुड़े अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा है कि बाजवा स्थिति को शांत करने की कोशिश करेंगे.

अधिकारियों का कहना है कि यदि सऊदी ने पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद को लेकर अपना मन नहीं बदला तो पाकिस्तान की सेंट्रल बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार की हालत ख़राब हो सकती है.

बाजवा ने सऊदी अरब के उप रक्षा मंत्री ख़ालिद बिन सलमान से मुलाक़ात की है और दोनों के बीच ‘सऊदी पाकिस्तान के द्विपक्षीय रिश्तों, सैन्य सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई.’

ये जानकारी ख़ालिद बिन सलमान ने ट्विटर पर दी है. सलमान ने ट्विटर पर लिखा है, ”आज मैंने अपने भाई पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर बाजवा से मुलाक़ात की. हमने द्विपक्षीय रिश्तों, सैन्य सहयोग और क्षेत्रीय शांति के लिए समान सोच पर बात की.”

सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर जारी एक बयान में बताया है कि सऊदी के सेना प्रमुख मेजर जनरल फ़ैयाद बिन हमाद अल रुवाइली ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख का स्वागत किया है.

बयान में कहा गया, ”मुलाक़ात के दौरान सैन्य सहयोग और साझा हितों के मुद्दों पर चर्चा की गई.”

पाकिस्तान और सऊदी अरब पारंपरिक तौर पर मित्र राष्ट्र हैं. साल 2018 के अंत में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तीन अरब डॉलर का क़र्ज़ और 3.2 अरब डॉलर की तेल ख़रीद के लिए क़र्ज़ गारंटी दी थी.

लेकिन पाकिस्तान के सऊदी अरब पर कश्मीर के मुद्दे पर दख़ल देने का दबाव डालने के बाद सऊदी अरब ने पाकिस्तान से एक अरब डॉलर जल्दी वसूल लिए हैं और अन्य एक अरब डॉलर का क़र्ज़ जल्द चुकाने के लिए कहा है.

हालांकि समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने जब इस मुद्दे पर सऊदी सरकार के मीडिया ऑफ़िस से टिप्पणी चाही तो कोई जवाब नहीं दिया गया.

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सऊदी अरब से भारत की गहरी दोस्ती का पाकिस्तान पर क्या असर?

सऊदी अरब ने पाकिस्तान की तेल ख़रीद के लिए क़र्ज़ की सुविधा को आगे बढ़ाने की गुहार को भी अनसुना कर दिया है. सैन्य और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने ये जानकारी रॉयटर्स को दी है.

पाकिस्तानी सेना के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने कहा, ”मुझे लगता है कि हमारा मक़सद उन्हें (सऊदी को) ये समझाना है कि हमारी विदेश नीति में कोई बदलाव नहीं आया है.”

भारत और पाकिस्तान दोनों ही समूचे कश्मीर पर अपना दावा करते रहे हैं. इस समय ये विवादित क्षेत्र दोनों देशों के बीच विभाजित है और इस पर दोनों का अपना-अपना नियंत्रण है. कश्मीर पर पूरे नियंत्रण को लेकर दोनों पड़ोसी देश तीन बार युद्ध कर चुके हैं.

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पाकिस्तान के कई बार मांग करने के बावजूद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कंटरीज़ यानी ओआईसी ने अभी तक कश्मीर के मुद्दे पर निम्न स्तरीय वार्ता ही की है.

विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करके सऊदी अरब भारत के साथ अपने व्यापारिक हितों को प्रभावित नहीं करना चाहता है. सऊदी अरब की चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी ईरान की भागीदारी को लेकर भी चिंताएं हो सकती हैं. पाकिस्तान और सऊदी के बीच द्विपक्षीय कारोबार 3.6 अरब डॉलर का है जबकि भारत और सऊदी का द्विपक्षीय व्यापार 27 अरब डॉलर का है. ऐसे में सऊदी अरब पाकिस्तान के लिए भारत को शायद ही नाराज़ कर पाएगा.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने हाल ही में कहा था कि अगर सऊदी अरब कश्मीर के मुद्दे पर बैठक नहीं बुलाता है तो पाकिस्तान दूसरे इस्लामी देशों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर वार्ता करेगा.

बीते साल पाकिस्तान इस्लामी देशों के एक समूह से सऊदी अरब के कहने पर अंतिम समय में पीछे हट गया था. सऊदी अरब ने इस समूह को ओआईसी में अपने नेतृत्व के लिए चुनौती माना था.

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सऊदी अरब की नाराज़गी दूर करने की कोशिश में पाकिस्तान

जनरल क़मर बाजवा के सऊदी दौरे से पहले सऊदी पहुंचने वाले पाकिस्तान के प्रभावशाली धर्मगुरू हाफ़िज़ ताहिर अशरफ़ी का कहना है कि उन्हें पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्तों में गर्माहट की उम्मीद है.

उन्होंने कहा कि सऊदी के शाह सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्तों का पुराना इतिहास है.

अशरफ़ी ने रायटर्स से कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि हालात इतने ख़राब हैं कि ये कह दिया जाए कि हम आमने-सामने हैं.’

अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक़्क़ानी ने ट्विटर पर सऊदी और पाकिस्तान के संबंधों में आए तनाव को लेकर लिखा है कि पाकिस्तान को सऊदी पर हमलावर होने से पहले उससे ली गई मदद के बारे में सोचना चाहिए. उन्होंने लिखा है, ”हम बस ये कहते रहे कि अमरीका ने हमें बर्बाद कर दिया, सऊदी ने हमें. हम केवल आर्थिक मदद के लिए मुँह ताकते रहे और लेते रहे.”

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