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कोरोना का 10 गुना खतरनाक रूप असल में खुशखबरी, जानिए ऐसा क्‍यों कह रहे एक्‍सपर्ट

हाइलाइट्स:

  • कोविड-19 नोवेल कोरोना वायरस का म्‍यूटेटेड स्‍ट्रेन है D614G
  • कोरोना के बाकी स्‍ट्रेन्‍स से कहीं ज्‍यादा संक्रामक बताया जा रहा है
  • एशिया के कुछ हिस्‍सों में मिला, इसके अलावा यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में भी
  • एक्‍सपर्ट्स ने कहा कि संक्रामक ज्‍यादा है लेकिन जानलेवा कम, ये अच्‍छी बात

नई दिल्‍ली
पिछले दिनों कोरोना वायरस का एक नया रूप सामने आने से मेडिकल जगत में खलबली मच गई। D614G नाम का यह स्‍ट्रेन असल में नोवेल कोरोना वायरस का म्‍यूटेटेड वर्जन है। इसे बाकी स्‍ट्रेन्‍स के मुकाबले 10 गुना तक संक्रामक बताया गया है। नॉर्थ अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई हिस्‍सों में मिले इस स्‍ट्रेन के बारे में एक्‍सपर्ट्स कहते हैं कि घबराने की बजाय यह अच्‍छी खबर है। कोरोना का यह स्‍ट्रेन भले ही संक्रामक ज्‍यादा हो, मगर जानलेवा कम है। कम से कम इंटरनैशनल सोसायटी ऑफ इन्‍फेक्शियस डिजीजेज (ISID) के प्रेसिडेंट-इलेक्‍ट पॉल तांब्या का यही मानना है।

‘नए स्‍ट्रेन से मौतों में कमी’
तांब्‍या के मुताबिक, D614G के संक्रमण वाले मरीजों में मृत्‍यु-दर कम रही है। तांब्‍या ने न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा, “‘शायद यह एक अच्‍छी बात है कि ऐसा वायरस है जो संक्रामक ज्‍यादा है मगर जानलेवा कम है।” उन्‍होंने कहा कि वायरस जैसे-जैसे म्‍यूटेट होते हैं, वैसे-वैसे कम जानलेवा होते जाते हैं। सिंगापुर के नैशनल यूनविर्सिटी हॉस्पिवल में सीनियर कंसल्‍टेंट तांब्‍या ने कहा कि ‘यह वायरस के हित में है कि वह ज्‍यादा लोगों को संक्रमित करे लेकिन उन्‍हें मारे नहीं क्‍योंकि रहने-खाने के लिए उसे होस्‍ट पर निर्भर रहना पड़ता है।’

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ज्‍यादा संक्रामक क्‍यों है ये स्‍ट्रेन?
दुनिया के कुछ हिस्‍सों में इस स्‍ट्रेन को फरवरी में ही देखा गया था। यूरोप और अमेरिका में यह स्‍ट्रेन भारी मात्रा में मिला था। मलेशिया के एक क्‍लस्‍टर में सामने आए 45 में से कम से कम तीन मामलों में यह स्‍ट्रेन – D614G पाया गया है। फ्लोरिडा की स्क्रिप्‍स यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च के अनुसार, यह म्‍यटेटेड वायरस इंसानी कोशिकाओं में घुसने में ज्‍यादा सक्षम है। रिसर्चर्स के अनुसार, स्‍पाइक प्रोटीन्‍स में बदलाव से वह एक सा

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D614G नाम ही क्‍यों पड़ा?
D614G उस प्रोटीन में मिलता है जो वायरस के ‘स्‍पाइक’ को बनाता है। यही स्‍पाइक हमारी कोशिकाओं में सेंध लगाता है। यह म्‍यूटेशन अमीनो एसिड को D (एस्‍पार्टिक एसिड) से G (ग्‍लाइसीन), पोजिशन 614 पर बदलता है। इसीलिए इसका नाम D614G रखा गया है। कोरोना वायरस की शुरुआत के बाद से उसके कई म्‍यूटेशन सामने आए हैं। ये स्‍ट्रेन यानी D614G पहली बार फरवरी में यूरोप के भीतर सामने आया था। कुछ रिसर्चर्स के अनुसार, इस म्‍यूटेशन के जरिए वायरस को एक तरह का बायोलॉजिकल एज मिल गया है जिससे वह दुनियाभर में फैलने में सक्षम हो गया है।


वैक्‍सीन भी बेअसर साबित होगी?
मलेशियाई स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के महानिदेशक नूर अब्‍दुल्‍ला के मुताबिक, इस स्‍ट्रेन के मामले सामने आने के भयंकर परिणाम हो सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि अबतक वैक्‍सीन पर जो भी स्‍टडीज हुई हैं वो इस स्‍ट्रेन के लिए नाकाफी साबित हो सकती हैं। यह भी संभव है इस म्‍यूटेशन पर वैक्‍सीन का कोई असर हो ही न।

Corona-Mutation

सांकेतिक तस्‍वीर।

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