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लखनऊ: शटलर कोच गौरव खन्ना को मिलेगा द्रोणाचार्य अवॉर्ड, कहा- यूपी में भी होनी चाहिए पैरा खेल की पॉलिसी – Dainik Bhaskar

लखनऊ15 मिनट पहले

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भारतीय शटलर कोच गौरव खन्ना को अब द्रोणाचार्य अवॉर्ड से नवाजा जायेगा। वह लखनऊ के रहने वाले हैं। गौरव के नेतृत्व में 300 से अधिक खिलाड़ी मेडल जीत चुके हैं।

  • उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य सभी राज्य में बनाई गई है खेल पालिसी
  • गौरव ने कहा कि खेल की दुनिया में अभी तक यूपी का प्रतिनिधित्व नहीं है

भारतीय शटलर कोच गौरव खन्ना को अब द्रोणाचार्य अवॉर्ड से नवाजा जायेगा। इससे पहले उन्हें यश भारतीय सम्मान दिया गया था। 315 से ज्यादा पदक जीत चुके पैरा बैडमिंटन कोच का कहना है कि ये सम्मान पाना उनके लिए गर्व कि बात है। लेकिन ये ख़ुशी और दोगुनी हो जाए अगर यूपी में भी खेल पॉलिसी बन जाए।

भारतीय पैरा बैडमिंटन को फर्श से अर्श तक ले जाने वाले कोच गौरव खन्ना को भारत सरकार ने द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजने कि घोषणा की है। इससे पहले गौरव खन्ना को यूपी सरकार ने 2016 में यश भारतीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। उन्होंने कहा कि सरकार से मांग करते हैं कि यहां भी खेल पॉलिसी बनाए ताकि प्रदेश के युवा देश विदेश में यूपी का नाम रोशन करें।

खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते गौरव खन्ना।

खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते गौरव खन्ना।

असली खुशी तब मिलेगी जब यूपी में भी खेल पॉलिसी बन जाएगी

हालंकि गौरव खन्ना का कहना है कि अवॉर्ड मिलने की ख़ुशी है लेकिन उन्हें ज्यादा खुशी तब होगी जब यूपी में भी खेल पॉलिसी बन जाए। यूपी ऐसा राज्य है जहां आज़ादी के बाद से खेल पॉलिसी नहीं बनी है। नतीजा यह है कि यूपी में एक से एक प्रतिभावान खिलाड़ी होने के बाद भी वो ओलंपिक तक नहीं पहुंचते। यूपी में खेल पॉलिसी ना होने की वजह से खिलाड़ी यहां से पलायन कर रहे है और दूसरे राज्यों में जाकर खेलते हैं। इतना बड़ा प्रदेश होने के बाद भी खेल की दुनिया में अभी तक यूपी का प्रतिनिधित्व नहीं है।

गौरव खन्ना के निर्देशन में 300 से ज्यादा खिलाड़ी पदक जीत चुके हैं।

गौरव खन्ना के निर्देशन में 300 से ज्यादा खिलाड़ी पदक जीत चुके हैं।

अब तक 315 खिलाड़ी पदक जीत चुके हैं

गौरव खन्ना के नेतृत्व में भारतीय शटलर 2015 से अब तक 315 से ज्यादा पदक जीत चुके हैं। जो एक रिकॉर्ड है। गौरव खन्ना रेलवे में बतौर उप निरीक्षक 1988 में अपने कैरियर कि शुरुआत की थी। हालांकि दुर्भाग्यवश 2000 में हुए एक सड़क हादसे में आंशिक रूप से विकलांग हो गए थे। बावजूद इसके गौरव खन्ना ने हार नहीं मानी और जज्बे से खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने का फैसला किया। 2014 में गौरव खन्ना को भारतीय पैरा बैडमिंटन का मुख्य कोच बना दिया गया।

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