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पृथ्वी के सबसे करीब से गुजरा एस्टेरॉयड ‘2020 क्यूजी’, 12.3 किमी प्रति सेकंड थी रफ्तार

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Updated Thu, 20 Aug 2020 03:17 AM IST

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पृथ्वी के सबसे पास से एक एस्ट्रॉयड होकर गुजरा है। इसका आकार एसयूवी कार के जितना बड़ा दिखा। यह एस्ट्रॉयड हिंद महासागर के 2950 किलोमीटर ऊपर से गुजरा था। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इसे ‘2020क्यूजी’ का नाम दिया गया है। नासा की जेट प्रोपेल्शन लेबोरेटरी (जेपीएल) ने कहा कि अगर यह पृथ्वी के संपर्क में आ भी जाता तो कोई घबराने की बात नहीं थी। लेकिन, यदि यह वायुमंडल में प्रवेश करता तो घर्षण के कारण जलकर राख हो सकता था।

इस एस्ट्रॉयड को सबसे पहले कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में लगे एक टेलीस्कोप के जरिये देखा गया था। नासा ने कहा है कि साल में कई बार इस आकार के एस्ट्रॉयड करीब इसी दूरी से निकलते हैं। हालांकि, यह अब तक रिकॉर्ड की गई सबसे कम दूरी है।

12.3 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार थी
एस्ट्रॉयड का आकार करीब 10-20 फीट यानी तीन से 6 मीटर था। रविवार को सुबह करीब 9.30 बजे यह हिंद महासागर के ऊपर से गुजरा। उस समय इसकी रफ्तार करीब 12.3 किलोमीटर प्रति सेकंड थी। यह पृथ्वी की उस कक्षा से होकर निकला, जहां अधिकतर टेलीकम्यूनिकेशन सैटेलाइट घूमती हैं।

हर साल पृथ्वी के वायुमंडल से टकराते हैं 30 एस्ट्रॉयड
एस्ट्रॉयड पर नजर रखने वाली द प्लेनेटरी सोसायटी के अनुसार, तीन फीट के लगभग 1 अरब एस्ट्रॉयड मौजूद हैं, लेकिन इनसे पृथ्वी के लिए कोई खतरा नहीं है। 90 फीट से बड़े एस्ट्रॉयड से पृथ्वी को काफी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। प्रत्येक वर्ष करीब 30 छोटे एस्ट्रॉयड पृथ्वी के वायुमंडल से टकराते हैं।

पृथ्वी के सबसे पास से एक एस्ट्रॉयड होकर गुजरा है। इसका आकार एसयूवी कार के जितना बड़ा दिखा। यह एस्ट्रॉयड हिंद महासागर के 2950 किलोमीटर ऊपर से गुजरा था। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इसे ‘2020क्यूजी’ का नाम दिया गया है। नासा की जेट प्रोपेल्शन लेबोरेटरी (जेपीएल) ने कहा कि अगर यह पृथ्वी के संपर्क में आ भी जाता तो कोई घबराने की बात नहीं थी। लेकिन, यदि यह वायुमंडल में प्रवेश करता तो घर्षण के कारण जलकर राख हो सकता था।

इस एस्ट्रॉयड को सबसे पहले कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में लगे एक टेलीस्कोप के जरिये देखा गया था। नासा ने कहा है कि साल में कई बार इस आकार के एस्ट्रॉयड करीब इसी दूरी से निकलते हैं। हालांकि, यह अब तक रिकॉर्ड की गई सबसे कम दूरी है।

12.3 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार थी

एस्ट्रॉयड का आकार करीब 10-20 फीट यानी तीन से 6 मीटर था। रविवार को सुबह करीब 9.30 बजे यह हिंद महासागर के ऊपर से गुजरा। उस समय इसकी रफ्तार करीब 12.3 किलोमीटर प्रति सेकंड थी। यह पृथ्वी की उस कक्षा से होकर निकला, जहां अधिकतर टेलीकम्यूनिकेशन सैटेलाइट घूमती हैं।

हर साल पृथ्वी के वायुमंडल से टकराते हैं 30 एस्ट्रॉयड
एस्ट्रॉयड पर नजर रखने वाली द प्लेनेटरी सोसायटी के अनुसार, तीन फीट के लगभग 1 अरब एस्ट्रॉयड मौजूद हैं, लेकिन इनसे पृथ्वी के लिए कोई खतरा नहीं है। 90 फीट से बड़े एस्ट्रॉयड से पृथ्वी को काफी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। प्रत्येक वर्ष करीब 30 छोटे एस्ट्रॉयड पृथ्वी के वायुमंडल से टकराते हैं।

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