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एम्स ने 1721 लोगों को दी आंखों की रोशनी, 2019 में सबसे ज्यादा कॉर्निया ट्रांसप्लांट

नई दिल्ली
एम्स ने कॉर्निया की वजह से ब्लाइंडनेस की जिंदगी गुजार रहे 1721 लोगों को साल 2019 में रोशनी देने में कामयाबी पाई है। एम्स के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में एक साल में कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया है। अच्छी बात यह है कि पिछले दो साल से लगातार दो हजार से ज्यादा कॉर्निया डोनेशन हुए। 2019 में डोनेशन में मिले कुल 2055 कॉर्निया में से 1721 कॉर्निया का इस्तेमाल किया गया। एम्स का दावा है कि 83.74 पर्सेंट कॉर्निया का यूटिलाइजेशन हुआ, जो राष्ट्रीय औसत 50 फीसदी से कहीं ज्यादा है।

एम्स में आयोजित 35वें आई डोनेशन फॉर्टनाइट का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन, एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया, एम्स के आरपी सेंटर के चीफ डॉक्टर अतुल कुमार, डॉक्टर जे एस टिटियाल के अलावा कई अन्य डॉक्टर भी जुड़े। इस मौके पर एम्स के आरपी सेंटर के प्रमुख डॉक्टर जे एस टिटियाल ने कहा कि साल दर साल एम्स में न केवल कॉर्निया डोनेशन में इजाफा हो रहा है, बल्कि कॉर्निया ट्रांसप्लांट की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है। हमारी कोशिश है कि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों के आंखों की रोशनी दें सकें।

एम्स की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 में एम्स में 2234 कॉर्निया डोनेशन हुआ था, लेकिन 1426 कॉर्निया का ही इस्तेमाल हो पाया। कॉर्निया का इस्तेमाल का औसत तब 63.83 फीसदी था, लेकिन इस बार यह 83.74 फीसदी पहुंच गया है। इस दौरान बताया गया कि पिछले साल एक सर्वे में यह खुलासा हुआ था कि देश की कुल आबादी का 0.36 पर्सेंट ब्लाइंड हैं। इसमें से 50 साल से कम उम्र के लोगों में 37.5 पर्सेंट ब्लाइंडनेस की वजह कॉर्निया डिजीज है।

1965 में नैशनल आई बैंक की स्थापना हुई थी और अब तक इस बैंक में 31 हजार कॉर्निया का कलेक्शन हुआ है। इसमें से 22 हजार कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए गए हैं। पिछले पांच साल से एम्स में लगातार हर साल एक हजार से ज्यादा कॉर्निया ट्रांसप्लांट सर्जरी हो रही हैं और इतने लोगों को आंखों की रोशनी मिल पा रही है।

मार्च से जुलाई के बीच जीरो डोनेशन
इस साल कॉर्निया डोनेशन बहुत खराब दौर से गुजर रहा है। एम्स की रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन की वजह से असर पड़ा है। मार्च से जुलाई के बीच जीरो डोनेशन हुआ है। सैकड़ों लोगों को इसकी जरूरत है, लेकिन डोनेशन के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा है। एम्स ने अपने यहां साल 2019 में हॉस्पिटल कॉर्निया रीट्रिवल प्रोग्राम शुरू किया था। इसका मकसद ज्यादा क्वॉलिटी वाला कॉर्निया जुटाना था। एम्स का कहना है कि हमने जो टारगेट तय किया था, कोरोना की वजह से वह इस साल असंभव होता दिख रहा है। हमारा लक्ष्य था कि इस साल कम से कम 3000 कॉर्निया डोनेशन हों, 2000 सर्जरी हों और कॉर्निया ट्रांसपोर्टेशन के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाए।

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